चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने मधुमक्खी पालकों को सलाह दी है कि मई-जून के दौरान पड़ने वाली गर्मी और लू मधुमक्खी कॉलोनियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। उत्तर भारत में तापमान कई बार 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे मधुमक्खियों की कार्यक्षमता, शहद उत्पादन तथा कॉलोनियों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। गर्मी के मौसम में फूलों में मकरंद और पानी की कमी होने लगती है। ऐसे में यदि मधुमक्खी कॉलोनियों की उचित देखभाल न की जाए तो कॉलोनियां कमजोर हो जाती हैं और शहद उत्पादन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस मौसम में छत्तों के अंदर का तापमान नियंत्रित रखना होता है, ताकि मधुमक्खियां अपनी ऊर्जा ठंडक बनाए रखने के बजाय पराग और मकरंद संग्रह में लगा सकें।
कुलपति प्रो. काम्बोज ने बताया कि मधुमक्खी पालन स्थल के पास स्वच्छ एवं ताजा पानी की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए। बहता पानी सबसे उपयुक्त माना जाता है, जबकि ट्यूबवेल या पंपिंग सेट के सीमेंटेड टैंक भी पानी के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। मौनगृह/ छत्तों के स्टैंड के नीचे पानी से भरे मिट्टी के कटोरे रखने से भी मधुमक्खियों को लाभ मिलता है और काली चींटियों का प्रकोप भी कम होता है। गंदे या रुके हुए पानी से रोग फैलने की संभावना रहती है, इसलिए हमेशा साफ पानी ही उपलब्ध कराया जाए।
छायादार स्थान पर रखें
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने बताया कि गर्मियों की शुरुआत में ही कॉलोनियों को छायादार स्थानों पर स्थानांतरित कर देना चाहिए। पेड़ों के नीचे कॉलोनियां रखना सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि पेड़ों की पत्तियां गर्म सूर्य किरणों को रोककर ठंडक प्रदान करती हैं। यदि प्राकृतिक छाया उपलब्ध न हो तो फूस, टाट या अस्थायी शेड बनाकर भी छाया की व्यवस्था की जा सकती है। मधुमक्खी पालक अपने स्थाई एपियरी क्षेत्र में शहतूत जैसे पेड़ भी लगा सकते हैं, जो छाया के साथ-साथ मकरंद भी उपलब्ध कराते हैं।
छत्तों में पर्याप्त स्थान और वायु संचार जरूरी
छत्तों में भीड़भाड़ की स्थिति नहीं बननी चाहिए। पर्याप्त फ्रेम उपलब्ध कराने तथा भीगे हुए बोरे की पल्लियां रखने से छत्तों का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हालांकि वर्षा ऋतु में यह व्यवस्था बंद कर देनी चाहिए ताकि नमी न बढ़े।
गर्मी के मौसम में उचित वायु संचार भी बेहद जरूरी है। इसके लिए मौनगृह के प्रवेश द्वार को खुला रखना, चैम्बर के बीच लकड़ी के छोटे टुकड़े लगाना तथा सुपर में थोड़ी जगह छोडऩा उपयोगी उपाय हैं। साथ ही मौनगृह के आसपास की घास-फूस और सूखा कचरा साफ रखना चाहिए ताकि हवा का प्रवाह बना रहे और आग लगने का खतरा कम हो।
सुबह या शाम करें निरीक्षण
कॉलोनियों का निरीक्षण सुबह 10 बजे से पहले या देर शाम ठंडे वातावरण में ही करें। अनावश्यक निरीक्षण से बचें और यदि भोजन की कमी हो तो चीनी और पानी को 1-1 अनुपात में मिलाकर कृत्रिम आहार उपलब्ध कराएं। यदि मधुमक्खी पालक समय रहते ये प्रबंधन उपाय अपनाते हैं तो गर्मी और लू से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

