कविता. रोहतक
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में डायरेक्टर का पद खाली होने जा रहा है। मौजूदा डायरेक्टर डॉ. एस.के. सिंघल 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके साथ ही संस्थान में नए डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार सरकार स्थायी डायरेक्टर के लिए लंबित इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी करेगी या फिर पहले की तरह किसी वरिष्ठ डॉक्टर को एक्टिंग चार्ज देकर व्यवस्था चलाएगी। इस मुद्दे पर पीजीआईएमएस के डॉक्टरों और आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की नजर सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।
दिसंबर 2024 में निकला था विज्ञापन, इंटरव्यू आज तक नहीं हुआ
स्थायी डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए दिसंबर 2024 में विज्ञापन जारी किया गया था। इस पद के लिए पीजीआईएमएस के 10 और बाहरी संस्थानों के 6 डॉक्टरों सहित कुल 16 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसे रोक दिया गया। इसके बाद स्थायी नियुक्ति नहीं हुई और डॉ. एस.के. सिंघल को डायरेक्टर का एक्टिंग चार्ज सौंप दिया गया। तब से यह चयन प्रक्रिया करीब डेढ़ साल से लंबित पड़ी हुई है।
डेढ़ साल से इंतजार कर रहे हैं उम्मीदवार
डायरेक्टर पद के लिए आवेदन करने वाले डॉक्टर अब भी चयन प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका मानना है कि यदि इस बार इंटरव्यू कराया जाता है तो उन्हें अपनी योग्यता साबित करने का अवसर मिलेगा। डॉ. एस.के. सिंघल के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद इन उम्मीदवारों की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं कि सरकार अब स्थायी नियुक्ति की दिशा में फैसला ले सकती है।
देशभर के पात्र डॉक्टर कर सकते हैं आवेदन
पीजीआईएमएस के डायरेक्टर पद के लिए पूरे देश से पात्र डॉक्टर आवेदन कर सकते हैं। नियमों के अनुसार उम्मीदवार की आयु 50 से 62 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक ही किसी व्यक्ति को डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना भी आवश्यक होता है।
रिटायरमेंट के बाद क्या होगा अगला कदम
31 जुलाई को डॉ. एस.के. सिंघल के सेवानिवृत्त होने के बाद संस्थान में नए नेतृत्व की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार के सामने यह निर्णय महत्वपूर्ण होगा कि लंबित इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कर स्थायी डायरेक्टर नियुक्त किया जाए या फिर किसी वरिष्ठ डॉक्टर को कार्यवाहक डायरेक्टर का जिम्मा सौंपा जाए। इस फैसले पर पीजीआईएमएस के प्रशासनिक और शैक्षणिक भविष्य की दिशा भी काफी हद तक निर्भर करेगी।
नियुक्ति को लेकर बढ़ी हलचल
डायरेक्टर का पद खाली होने की तारीख नजदीक आने के साथ ही संस्थान के भीतर और बाहर संभावित दावेदारों के बीच हलचल बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग और सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि इस बार इंटरव्यू कराया जाता है तो डेढ़ साल से अटकी चयन प्रक्रिया पूरी हो सकती है, जबकि एक बार फिर एक्टिंग चार्ज दिए जाने की स्थिति में स्थायी नियुक्ति का इंतजार और लंबा हो सकता है।

