Punjab News: पिछले दो हफ़्तों से बठिंडा नगर निगम के सफ़ाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर की सफ़ाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। शहर के कई इलाकों, मुख्य बाज़ारों और सड़कों पर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे लोगों को काफ़ी परेशानी हो रही है।
बताया जा रहा है कि नगर निगम के कैज़ुअल (अस्थायी) सफ़ाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं और उन्हें स्थायी सफ़ाई कर्मचारियों का भी समर्थन मिल रहा है। बठिंडा शहर के लगभग 50 वार्ड इस हड़ताल से प्रभावित हैं। एक तरफ़ जहाँ नगर निगम चुनावों का माहौल बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ़ शहर की सफ़ाई व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताते हुए कहा कि निगम सफ़ाई के नाम पर लोगों से छह महीने से लेकर एक साल तक की अग्रिम फ़ीस लेता है, लेकिन सफ़ाई कर्मचारी अक्सर हड़ताल पर चले जाते हैं। लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में कूड़े के ढेरों से आने वाली बदबू के कारण बीमारियों के फैलने का ख़तरा बढ़ गया है।
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लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो शहर में कोई बड़ी बीमारी फैल सकती है।
इस बीच, नगर निगम के अधिकारी संदीप कटारिया ने कहा कि हड़ताल को ख़त्म करने के लिए कर्मचारियों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मांगें स्थानीय स्तर की हैं, जबकि कुछ मुद्दे सरकार से जुड़े हैं, इसलिए इसमें समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि निगम में 1200 से ज़्यादा कर्मचारी हैं, जिनमें से आधे से ज़्यादा अस्थायी कर्मचारी हैं और इसी वजह से स्थायी कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं।

