Thursday, September 24, 2026
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Punjab News: मान सरकार ने 518 गौशालाओं का ₹100 करोड़ से ज़्यादा का बिजली बिल माफ़

Punjab News: पंजाब गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री कीमती भगत ने कहा कि पंजाब सरकार मवेशियों की देखभाल और सुरक्षा तथा गौशालाओं में बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने राज्य भर की 518 गौशालाओं का ₹100 करोड़ से अधिक का बिजली बिल माफ़ किया है, जिसमें अमृतसर ज़िले की 14 गौशालाएँ भी शामिल हैं।

वे आज अमृतसर के ज़िला प्रशासनिक परिसर में ज़िला अधिकारियों और गौशाला प्रशासकों के साथ बैठक करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान का भी धन्यवाद किया। कीमती भगत ने बताया कि आयोग की सिफारिश पर अमल करते हुए पंजाब सरकार ने घायल मवेशियों के इलाज और देखभाल में मदद के लिए ₹3.6 करोड़ की लागत से गौशालाओं को ‘काऊ लिफ्टर’ (मवेशियों को उठाने वाली मशीनें) उपलब्ध कराई हैं; इसमें अमृतसर ज़िले की 14 गौशालाएँ भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने गौशालाओं में रखे गए प्रत्येक मवेशी की देखभाल के लिए ₹61 प्रतिदिन देने का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस मामले पर बैठक के बाद गौशालाओं को यह धनराशि जारी करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी।

उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य भर में आवारा और बेसहारा मवेशियों की देखभाल, सुरक्षा और कल्याण के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं, ताकि कोई भी जानवर सड़कों पर भटकता न रहे। उन्होंने कहा कि आवारा मवेशी न केवल किसानों की फ़सलों को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफ़िक से जुड़ी समस्याओं का कारण भी बनते हैं।

उन्होंने कहा कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने और गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार विभिन्न ज़िलों का दौरा कर रहे हैं और डिप्टी कमिश्नरों तथा संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। इससे पहले, पशुपालन और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की—जिनमें सरकारी गौशालाओं का प्रबंधन, ‘गो-सेस’ (cow cess) और गो-हत्या व तस्करी की रोकथाम शामिल थे—और ज़रूरी दिशा-निर्देश जारी किए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि नगर परिषदों और विभिन्न विभागों द्वारा ‘गो-सेस’ के रूप में इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल मवेशियों की देखभाल, सुरक्षा और कल्याण के लिए किया जाए। साथ ही, उन्होंने उन्हें गौशाला प्रबंधकों के साथ हर तीन महीने में बैठकें करने और सड़कों पर घूमने वाले आवारा और बेसहारा मवेशियों को तुरंत गौशालाओं में भेजने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया।

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