Friday, July 3, 2026
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कहीं ताले, कहीं बदबू… रोहतक के सार्वजनिक शौचालय खुद बने परेशानी

कविता.रोहतक : शहर को स्वच्छ और सुविधाजनक बनाने के दावों के बीच सार्वजनिक शौचालयों की हालत सवालों के घेरे में है। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बने शौचालय या तो बंद पड़े हैं या फिर उनकी स्थिति इतनी खराब है कि लोग उनका इस्तेमाल करने से बचते हैं। कहीं ताले लटके हैं, तो कहीं पानी और सफाई की व्यवस्था नहीं होने से बदबू का आलम है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बाहर से आने वाले लोगों को झेलनी पड़ रही है।

नगर निगम ने सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव के लिए निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी हुई है, लेकिन जमीन पर इसका असर नजर नहीं आ रहा। कई स्थानों पर शौचालय बनने के वर्षों बाद भी जनता के लिए शुरू नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि जब शहर में लगातार विकास कार्यों के दावे किए जा रहे हैं तो सार्वजनिक सुविधाओं की ऐसी अनदेखी समझ से परे है।

17 जुलाई के बाद बदलेगी व्यवस्था

नगर निगम की ओर से सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव का मौजूदा अनुबंध 17 जुलाई को समाप्त हो रहा है। अब नए टेंडर की प्रक्रिया से लोगों को उम्मीद है कि सफाई, पानी, बिजली और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा। हालांकि शहरवासी चाहते हैं कि इस बार सिर्फ टेंडर बदलने तक मामला सीमित न रहे, बल्कि व्यवस्था भी बदले।

कई जगह शौचालय बने, लेकिन उपयोग नहीं

शहर के कई सार्वजनिक शौचालय लंबे समय से बंद पड़े हैं। कहीं उद्घाटन के बाद भी ताले नहीं खुले तो कहीं भवन तैयार होने के बावजूद संचालन शुरू नहीं हुआ। इससे बाजारों और व्यस्त इलाकों में आने वाले लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

सुविधाओं का अभाव बना बड़ी समस्या

अनेक शौचालयों में पानी की आपूर्ति नहीं है, फ्लश काम नहीं करते और कई जगह बिजली की व्यवस्था भी ठप है। कुछ स्थानों पर दरवाजे टूटे हुए हैं तो कहीं नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी और बदबू फैली रहती है। ऐसे हालात में लोग मजबूरी में खुले स्थानों का सहारा लेने को विवश हो जाते हैं।

सीएम तक पहुंच चुका है मामला

शहर के सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति का मुद्दा पहले भी प्रदेश स्तर तक उठ चुका है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराते हुए बंद पड़े शौचालयों को शुरू करने और रखरखाव बेहतर बनाने की मांग की थी, लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।

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