कविता.रोहतक : जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता करने की जरूरत है। जिले में कई ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं और इनमें कुछ जगहें गंभीर दुर्घटनाओं व मौतों के कारण ब्लैक स्पॉट के रूप में सामने आई हैं। इनमें चुलियाना मोड़ सबसे संवेदनशील बताया जा रहा है।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि इन जगहों पर हादसे क्यों होते हैं, बल्कि यह भी है कि हादसों के आंकड़े सामने आने के बाद भी सड़क सुरक्षा के इंतजाम कितने प्रभावी हैं। चुलियाना मोड़ पर लगातार हो रहे गंभीर हादसे इसे जिले के सबसे संवेदनशील ब्लैक स्पॉट में शामिल करते हैं। तेज रफ्तार, अचानक कट, मोड़ पर सीमित दृश्यता और वाहनों की आवाजाही जैसे कारण यहां खतरा बढ़ाते हैं। ऐसे स्थान पर वाहन चालक की छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। यहां जरूरत केवल चेतावनी बोर्ड लगाने की नहीं, बल्कि सड़क डिजाइन, स्पीड कंट्रोल और पर्याप्त रोशनी जैसे स्थायी सुरक्षा उपायों की है।
इन जगहों पर संभलकर चलें
- चुलियाना मोड़
- कुलताना मोड़
- सांपला पूर्वी बाईपास
- खरवाड़ मंदिर चौराहा
- हवेली ढाबा क्षेत्र
- छोटू राम कॉलेज क्षेत्र
ये वे प्रमुख क्षेत्र हैं जिन्हें दुर्घटना संभावित स्थानों के तौर पर चिन्हित किया गया है। इन स्थानों से गुजरते समय वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
कुलताना मोड़ पर रफ्तार बनती है जोखिम
कुलताना मोड़ पर तेज गति और सड़क की बनावट दुर्घटना का खतरा बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हाईवे पर वाहन सामान्यतः अधिक गति से चलते हैं, लेकिन मोड़ के पास अचानक गति कम करना कई बार मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पीछे से आने वाले वाहन और मोड़ पर सामने से आने वाला ट्रैफिक दुर्घटना की आशंका बढ़ा देता है। यहां स्पीड लिमिट का पालन और सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
सांपला बाईपास से चौराहों तक चुनौती
सांपला का पूर्वी बाईपास भी भारी यातायात के कारण संवेदनशील क्षेत्र है। वहीं खरवाड़ मंदिर चौराहा वाहनों की आवाजाही और क्रॉसिंग के कारण जोखिम वाला स्थान बन जाता है। पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहनों और तेज रफ्तार बड़े वाहनों के बीच थोड़ी-सी असावधानी गंभीर परिणाम दे सकती है। ऐसे स्थानों पर सड़क पार करते समय जल्दबाजी से बचना और वाहन चालकों का क्रॉसिंग के पास गति नियंत्रित रखना जरूरी है।
हाईवे पर रफ्तार ही सबसे बड़ा खतरा
हवेली ढाबा क्षेत्र और छोटू राम कॉलेज के आसपास भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ढाबों के आसपास वाहनों का अचानक रुकना या मुड़ना और कॉलेज क्षेत्र में पैदल यात्रियों व छात्रों की आवाजाही जोखिम बढ़ा सकती है। अचानक ब्रेक या कट से बचना और ओवरटेक करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
NH-9 पर सबसे ज्यादा दबाव
रोहतक के कई संवेदनशील ब्लैक स्पॉट व्यस्त एनएच-9 पर स्थित हैं। इसके अलावा एनएच-709, एनएच-352 और एसएच-18 पर भी दुर्घटना संभावित क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। इन सड़कों पर भारी यातायात और अपेक्षाकृत तेज गति के कारण सड़क सुरक्षा के उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है। ब्लैक स्पॉट की पहचान तभी सार्थक होगी, जब इन स्थानों पर हादसों के कारणों के अनुसार ठोस सुधार किए जाएं।
सिर्फ सिस्टम नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी
ब्लैक स्पॉट की सूची प्रशासन और सड़क एजेंसियों के लिए चेतावनी है, लेकिन सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं है। चालक यदि गति सीमा का पालन करें, शराब या नशे में वाहन न चलाएं, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें, मोबाइल फोन से दूरी रखें और मोड़ व चौराहों पर अतिरिक्त सावधानी बरतें तो हादसों की गंभीरता काफी कम की जा सकती है।
एक हादसा भी कम हो तो बदलाव सफल
किसी सड़क को सुरक्षित बनाने का असली पैमाना यह नहीं कि वहां कितने चेतावनी बोर्ड लगे हैं, बल्कि यह है कि वहां हादसों की संख्या कितनी कम हुई। रोहतक के इन ब्लैक स्पॉट पर दुर्घटनाओं के कारणों का अध्ययन, पर्याप्त रोशनी, संकेतक, रंबल स्ट्रिप, स्पीड नियंत्रण, सुरक्षित क्रॉसिंग और सड़क डिजाइन में जरूरी सुधार किए जाने चाहिए। साथ ही वाहन चालकों को भी इन संवेदनशील स्थानों को पहचानकर अपनी गति और व्यवहार में बदलाव करना होगा।


