रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (PGIMS) की बायोकेमिस्ट्री लैब ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लैब को राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) की प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सिम्मी खरब एवं उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल ने डाॅ. सिम्मी की टीम को बधाई देते हुए कहा कि एनएबीएल की मान्यता मिलने का सीधा अर्थ है कि अब पीजीआईएमएस की बायोकेमिस्ट्री लैब में होने वाली सभी जांचें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरेंगी। यहां से जारी होने वाली रिपोर्ट को देश-विदेश के सभी अस्पतालों और संस्थानों में भी मान्यता मिलेगी। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि यह सिर्फ एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि हरियाणा की जनता के विश्वास का प्रमाण पत्र है। अब हमारे मरीजों को उनकी बाॅयोकैमिस्ट्ी विभाग की रिपोर्ट की गुणवत्ता पर कोई संदेह नहीं रहेगा। डाॅ. अग्रवाल ने कहा कि यह पीजीआईएमएस के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि रोहतक पीजीआईएमएस को उत्तर भारत का सबसे भरोसेमंद सरकारी जांच केंद्र बनाएं। बायोकेमिस्ट्री लैब की यह मान्यता उस दिशा में पहला मजबूत कदम है। यह उपलब्धि पूरे संस्थान का मनोबल बढ़ाएगी।
डॉ. सिम्मी खरब के नेतृत्व में कड़ी मेहनत रंग लाई
बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सिम्मी खरब ने बताया कि एनएबीएल की मान्यता के लिए पिछले करीब एक साल से लगातार तैयारी चल रही थी। लैब के सभी उपकरणों का अंशांकन, स्टाफ की ट्रेनिंग, जांच की हर स्टेप की रिकॉर्ड कीपिंग और क्वालिटी कंट्रोल जैसे सैकड़ों मानकों को पूरा करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह पूरी टीम की जीत है। हमारे फैकल्टी, टेक्नीशियन और रेजिडेंट डॉक्टरों ने दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने बताया कि एनएबीएल की टीम ने तीन दिन तक बारीकी से हर प्रक्रिया को जांचा, तब जाकर यह मान्यता मिली है। डॉ. खरब ने कहा कि इसका मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा।
डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि पीजीआईएमएस में प्रतिदिन 3000 से अधिक मरीजों की बायोकेमिस्ट्री जांचें होती हैं। इनमें शुगर, किडनी फंक्शन, लिवर फंक्शन, लिपिड प्रोफाइल, हार्मोन टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण टेस्ट शामिल हैं। एनएबीएल मान्यता के बाद अब हर रिपोर्ट के साथ गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। उन्होंने कहा कि गरीब से गरीब मरीज को भी अब प्राइवेट लैब जैसी विश्वसनीय रिपोर्ट सरकारी अस्पताल मेें फ्री मे मिलेगी।
टीम वर्क की मिसाल
डॉ. सिम्मी खरब ने अपनी टीम के डॉ. वसुधा, डॉ. गुलशन, डॉ. दीपिका, श्री उमेश, श्री जसप्रीत, श्री विजय कालरा, सभी एलटी सहित सभी स्टाफ सदस्यों का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल, निदेशक डाॅ.एस.के. सिंघल का लगातार मार्गदर्शन और प्रशासन का सहयोग मिला, तभी हम यह मुकाम हासिल कर पाए। डाॅ. सिम्मी ने बताया कि एनएबीएल भारत सरकार की क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के अधीन एक स्वायत्त संस्था है जो लैब्स की तकनीकी क्षमता और गुणवत्ता प्रणाली की जांच के बाद मान्यता देती है। एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब की रिपोर्ट को 100 से अधिक देशों में मान्यता मिलती है।
इस अवसर पर क्वालिटी मैनेजर डॉ. वसुधा, डॉ. गुलशन, डॉ. दीपिका, उमेश, जसप्रीत, विजय कालरा, सभी एलटी का सहयोग रहा।

