हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसानों को धान की पराली जलाने से रोकने के लिए ग्राम स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और सभी जिलों में “पराली सुरक्षा बल” का भी गठन किया गया है।
हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी सराहना की है।
राणा ने यह जानकारी केंद्र सरकार द्वारा आयोजित “फसल अवशेष जलाने के प्रबंधन के मुद्दे पर मंत्री-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक” में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चंडीगढ़ से हरियाणा का पक्ष रखते हुए दी। इस अवसर पर विभाग के निदेशक अमित खत्री, अतिरिक्त निदेशक प्रदीप मील भी उपस्थित थे।
दिल्ली में हुई इस बैठक में उक्त दोनों केंद्रीय मंत्रियों के अलावा हरियाणा , पंजाब , उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , राजस्थान तथा दिल्ली के कृषि मंत्री भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने राज्य से जुड़े हुए थे।
श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीकों और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से निरंतर सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कुल 66,050 आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, राज्य के 37 लाख एकड़ धान क्षेत्र के प्रबंधन हेतु कुल 440 करोड़ रुपये की अनुमानित प्रोत्साहन राशि तय की गई है, जिसके तहत किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
उन्होंने आगे बताया कि पर्यावरण संरक्षण और जल बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धान की सीधी बिजाई (DSR) अपनाने वाले किसानों को 4,500 रुपये प्रति एकड़ तथा धान की फसल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों की बिजाई (फसल विविधीकरण) करने वाले किसानों को 8,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये प्रति एकड़ तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
क्षेत्रीय स्तर पर कड़ी निगरानी व्यवस्था के संबंध में जानकारी देते हुए श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि खेतों में निगरानी के लिए वर्तमान में 20 ड्रोन तैनात किए जा चुके हैं और शीघ्र ही 30 अतिरिक्त ड्रोन भी तैनात किए जाएंगे। राज्य में कड़े नियमों और जागरूकता अभियानों के कारण अब तक केवल 7 फसल अवशेष जलाने (AFL) की घटनाएं ही रिपोर्ट हुई हैं। इसमें भी हांसी जिले में दर्ज की गई 1 घटना दुर्घटनावश हुई थी, जिसके संबंध में नियमानुसार 5,000 रुपये का चालान जारी किया गया। बाकी की घटनाएं गैर -कृषि क्षेत्र में हुई हैं।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने आगे बताया कि तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करते हुए पूरे राज्य में 79 “पीएम 2.5” सेंसर स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तर पर कुल 8,535 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा सभी जिलों में विशेष ‘पराली सुरक्षा बल’ का गठन किया गया है।
उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी मांग कि पराली प्रबंधन के तहत हरियाणा सरकार द्वारा जो किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है , उसमें से 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार को वहन करना चाहिए ताकि राज्य सरकार पर अधिक वित्तीय भार न पड़े और ज्यादा किसानों को इस योजना से जोड़ सकें।
कृषि मंत्री ने प्रदेश के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे पराली में आग लगाने के बजाय सरकारी योजनाओं, प्रोत्साहन राशि और कृषि उपकरणों का अधिकतम लाभ उठाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने और भूमि की उर्वरता शक्ति को सुरक्षित रखने में योगदान दें।

