Tuesday, September 1, 2026
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साइबर ठगी का नया हथियार ‘डर’ नहीं, भरोसा, एक क्लिक से पहले ठग करते हैं दिमाग पर कब्जा

  • बैंक-ओटीपी से आगे बढ़ा साइबर अपराध, नौकरी, निवेश, डिलीवरी, कस्टमर केयर और सरकारी सेवाओं के नाम पर बुना जा रहा जाल

कविता.रोहतक : साइबर ठगी अब केवल ओटीपी पूछने या बैंक अधिकारी बनकर फोन करने तक सीमित नहीं रह गई है। ठग पहले पीड़ित की जरूरत पहचानते हैं और फिर उसी जरूरत को हथियार बनाकर जाल बिछाते हैं। किसी को नौकरी का भरोसा दिया जाता है तो किसी को निवेश में मोटा मुनाफा दिखाया जाता है।

देश में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गृह मंत्रालय के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की 24.65 लाख से ज्यादा शिकायतों में 8,690 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। रोहतक में जून में 12 केस पकड़े गए हैं और लाखों की ठगी हुई है।

ठगी की शुरुआत पैसे से नहीं, भरोसे से होती है

ठग सीधे खाते में सेंध लगाने के बजाय पहले ऐसा माहौल तैयार करते हैं कि सामने वाले को उनकी बात वास्तविक लगे। कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए ऐसी जानकारी सामने रखी जाती है जो व्यक्ति की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी हो। जैसे ही सामने वाला बातचीत में फंसता है, उसे जल्दी निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जाता है।

नौकरी से लेकर निवेश तक, लालच की जगह जरूरत को निशाना

साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीके को इतना बदल दिया है कि हर उम्र और वर्ग के लिए अलग जाल तैयार किया जा सकता है। युवाओं को ऑनलाइन नौकरी और पार्ट टाइम कमाई का झांसा, कारोबारियों को निवेश या भुगतान से जुड़ा लालच और आम लोगों को खरीदारी, डिलीवरी या रिफंड से जुड़े संदेश भेजे जा सकते हैं। शुरुआत में रकम छोटी रखकर भरोसा बनाया जाता है और बाद में बड़ी रकम की मांग सामने आ सकती है।

स्क्रीन पर दिख रही चीज भी हमेशा सच नहीं

साइबर ठग अब केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं। फर्जी वेबसाइट, नकली ऐप, मिलते-जुलते वेब पेज और सोशल मीडिया अकाउंट तैयार कर असली सेवाओं जैसा माहौल बनाया जा सकता है। ऐसे में वेबसाइट का नाम, ऐप का स्रोत और संपर्क का माध्यम जांचना जरूरी है। खासकर सर्च इंजन से मिले किसी अनजान नंबर को कस्टमर केयर समझकर संपर्क करना जोखिम भरा हो सकता है।

‘अभी करो’ वाला दबाव सबसे बड़ा खतरे का संकेत

ठगी की बातचीत में एक पैटर्न अक्सर दिखाई देता है कि सामने वाले को सोचने का समय नहीं दिया जाता। कभी खाते में गड़बड़ी का डर, कभी कानूनी कार्रवाई की धमकी तो कभी ऑफर खत्म होने की बात कहकर तुरंत कदम उठाने को कहा जाता है। असल में यह दबाव पीड़ित को सत्यापन से दूर रखने का तरीका हो सकता है।

एक गलती के बाद दूसरी गलती न करें

अगर खाते से पैसा निकल गया है तो घबराकर ठग से बातचीत जारी रखने या किसी दूसरे व्यक्ति के बताए तरीके से दोबारा भुगतान करने से नुकसान बढ़ सकता है। वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करना जरूरी है। इसके साथ ही संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तत्काल सूचना देनी चाहिए।

ठगों की रफ्तार के सामने कुछ मिनट भी महत्वपूर्ण

साइबर ठगी में समय सबसे महत्वपूर्ण है। पैसा गलत खाते में जाने के बाद जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी जल्दी संबंधित तंत्र को कार्रवाई का मौका मिलेगा।

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