Tuesday, October 20, 2026
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हाउस में हंगामे का डर! रोहतक में मेयर और पूर्व मंत्री ने पार्षदों को साधा, अब अधिकारियों की बारी

कविता.रोहतक : नगर निगम की राजनीति में 22 अक्टूबर को होने वाली हाउस की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। सदन में पार्षदों के तीखे तेवर और हंगामे की आशंका को देखते हुए मेयर रामअवतार वाल्मीकि और पूर्व मंत्री ने 19 अक्टूबर को पार्षदों के साथ बैठक कर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की। वार्डों में विकास कार्यों की रफ्तार, सीवर-पेयजल की बदहाल व्यवस्था और लंबित कामों को लेकर पार्षदों की शिकायतें सामने आईं।

अब अगली कड़ी में हाउस की बैठक से पहले अधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसमें पार्षदों की समस्याओं, लंबित कार्यों और संबंधित विभागों की जवाबदेही पर चर्चा की जाएगी। सियासी तौर पर यह कवायद इसलिए भी अहम है, क्योंकि सदन में पार्षदों के सवालों का सामना करने से पहले मेयर पक्ष व्यवस्था को दुरुस्त करने और संभावित टकराव को संभालने की तैयारी में जुटा है।

पहले पार्षदों की नाराजगी दूर करने की कोशिश, अब अफसरों से जवाब लेने की तैयारी

19 अक्टूबर को हुई बैठक में मेयर और पूर्व मंत्री ने पार्षदों के साथ संवाद कर उनकी शिकायतें सुनीं। पार्षदों ने अपने वार्डों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाया। कहीं सीवर व्यवस्था परेशानी का कारण है तो कहीं पेयजल आपूर्ति और विकास कार्यों में देरी को लेकर नाराजगी है। बैठक का मकसद पार्षदों को भरोसा दिलाना और उनके मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाना रहा। अब अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक में इन समस्याओं पर चर्चा होगी, ताकि हाउस की बैठक से पहले संबंधित विभागों से स्थिति स्पष्ट कराई जा सके। इससे मेयर पक्ष को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किन समस्याओं का समाधान हो चुका है और किन मामलों में अभी कार्रवाई बाकी है।

22 अक्टूबर को हाउस में दिख सकते हैं पार्षदों के तेवर

नगर निगम हाउस की बैठक 22 अक्टूबर को होनी है। इससे पहले पार्षदों की नाराजगी दूर करने के प्रयासों को सदन के संभावित माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। वार्डों में विकास कार्यों और जनसमस्याओं को लेकर असंतुष्ट पार्षद बैठक में सवाल उठा सकते हैं। यदि उन्हें अपने वार्डों में काम नहीं होने या अधिकारियों की ओर से सुनवाई नहीं होने की शिकायत रहती है, तो सदन में मामला गरमा सकता है। यही वजह है कि हाउस से पहले पार्षदों के साथ बैठक कर उनकी बात सुनने और उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश की गई। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह कवायद 22 अक्टूबर को सदन का माहौल सहज बनाने में कितनी कारगर साबित होती है।

अधिकारियों के साथ बैठक में तय होगी आगे की रणनीति

पार्षदों के साथ बातचीत के बाद अब अधिकारियों के साथ बैठक अहम मानी जा रही है। इसमें जन स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने वार्डों की समस्याएं रखी जा सकती हैं। उद्देश्य रहेगा कि पेयजल, सीवर और लंबित विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आए तथा जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई के बारे में जानकारी ली जाए। हाउस की बैठक से पहले यह तैयारी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सदन में उठने वाले सवालों पर निगम प्रशासन के पास स्पष्ट जवाब होने चाहिए। यदि समस्याओं पर पहले से काम शुरू हो जाता है या उनकी समयसीमा तय हो जाती है, तो पार्षदों की नाराजगी कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका असर बैठक के दौरान ही स्पष्ट होगा।

मेयर के सामने दोहरी चुनौती, भरोसा भी कायम रखना और काम भी दिखाना

हाउस की बैठक से पहले मेयर रामअवतार वाल्मीकि के सामने पार्षदों का भरोसा बनाए रखने के साथ वार्डों में विकास कार्यों को गति देने की चुनौती है। पूर्व मंत्री ने भी पार्षदों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन पार्षदों की शिकायतों का वास्तविक समाधान ही इन आश्वासनों की परीक्षा होगा। नगर निगम की राजनीति में केवल बैठकें कर नाराजगी दूर करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वार्डों में काम होता दिखाई देना भी जरूरी है। अब 22 अक्टूबर की हाउस बैठक बताएगी कि पार्षदों की शिकायतों को लेकर बनी सहमति सदन में कायम रहती है या फिर लंबित समस्याएं एक बार फिर सियासी खींचतान का कारण बनती हैं।

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