Monday, August 31, 2026
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न नियमों की परवाह, न जान की चिंता : रोहतक में नाबालिगों की तेज रफ्तार बनी मुसीबत

  • नाबालिगों का वाहन चलाना बना चिंता का कारण

कविता.रोहतक : सड़कों पर यातायात नियमों की अनदेखी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में कई जगहों पर नाबालिग किशोर बिना हेलमेट, बिना ड्राइविंग लाइसेंस और तेज रफ्तार में दोपहिया वाहन दौड़ाते दिखाई दे रहे हैं। उम्र कम होने के बावजूद हाथों में वाहनों की चाबी आ जाना अब सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

पुलिस की ओर से समय-समय पर चालान काटकर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसका असर जमीन पर ज्यादा नजर नहीं आ रहा। कार्रवाई के बाद भी कई किशोर दोबारा वाहन लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं। ऐसे में केवल पुलिस की सख्ती ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम हो जाती है। किशोर उम्र में वाहन चलाने का उत्साह कई बार लापरवाही में बदल जाता है। अनुभव की कमी, तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी गंभीर हादसों का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों की जिद के आगे झुकने के बजाय उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और कम उम्र में वाहन चलाने से रोकें। क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है।

नाबालिग द्वारा वाहन चलाने के खतरे

कम उम्र में वाहन चलाने वाले किशोरों में सड़क की परिस्थितियों को समझने और अचानक आने वाली स्थिति से निपटने का अनुभव कम होता है। तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की जानकारी का अभाव दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। नाबालिगों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं में गंभीर चोट लगने और जान जाने का खतरा अधिक रहता है। कई मामलों में किशोरों की गलती का खामियाजा दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों को भी भुगतना पड़ता है। इसलिए कम उम्र में वाहन चलाने की आदत को रोकना बेहद जरूरी है।

यातायात नियमों का पालन जरूरी, सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं नियम

सड़क पर सुरक्षित सफर के लिए यातायात नियमों का पालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। वाहन चलाते समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। दोपहिया वाहन चलाने वाले चालक और पीछे बैठने वाले व्यक्ति को हेलमेट पहनना चाहिए। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाना चाहिए और रेड लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग व अन्य यातायात संकेतों का पालन करना चाहिए। शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन कर वाहन चलाना कानूनन अपराध है और इससे हादसों की संभावना बढ़ जाती है।

पुलिस कार्रवाई के साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम

नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की समस्या को केवल पुलिस कार्रवाई से खत्म नहीं किया जा सकता। इसमें माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कई बार अभिभावक बच्चों की जिद के आगे झुककर उन्हें वाहन दे देते हैं, जबकि उन्हें यह समझना चाहिए कि कम उम्र में वाहन देना बच्चे की सुरक्षा के साथ जोखिम है। माता-पिता को अपने बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देनी चाहिए और उन्हें बिना लाइसेंस वाहन चलाने से रोकना चाहिए। अगर अभिभावक सख्ती बरतें और बच्चों को वाहन देने से साफ मना कर दें तो नाबालिग किशोरों को वाहन चलाने से रोका जा सकता है।

अभिभावक बरतें ये सावधानियां

  • बच्चों को कम उम्र में वाहन न दें।
  • वाहन की चाबी बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों के बारे में जागरूक करें।
  • तेज रफ्तार और स्टंट जैसी गतिविधियों से रोकें।
  • अगर बच्चा नियम तोड़ता है तो उसे समझाने के साथ सख्ती भी करें।

चालान से ज्यादा जरूरी है सोच में बदलाव

यातायात नियमों का पालन केवल पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। नाबालिग किशोरों का वाहन चलाना एक छोटी सी लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर खतरा है। परिवार, पुलिस और समाज मिलकर ही इस समस्या को खत्म कर सकते हैं। जरूरत है कि अभिभावक बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देने से पहले उनकी उम्र, समझ और कानूनी नियमों का ध्यान रखें। सुरक्षित सड़क व्यवस्था के लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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