रोहतक के उपायुक्त सतबीर सिंह ने जिला के सभी बागवानी पौधशाला संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे हरियाणा बागवानी पौधशाला अधिनियम, 2025 तथा इसके तहत अधिसूचित हरियाणा बागवानी पौधशाला नियम, 2026 के प्रावधानों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करें। राज्य सरकार द्वारा 30 जून 2026 को अधिसूचित इन नियमों का उद्देश्य बागवानी पौधशालाओं के संचालन को व्यवस्थित करना, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा किसानों के हितों की रक्षा करना है।
सतबीर सिंह ने कहा है कि नियमों के अनुसार बागवानी पौधशाला के स्वामी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक है। लाइसेंस पौधशाला द्वारा विक्रय अथवा प्रवर्धन के लिए प्रस्तावित बागवानी पौधों एवं पौध सामग्री की श्रेणी के आधार पर जारी किया जायेगा। फलीय पौधों के मामले में संबंधित किस्म एवं उपकिस्म का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा।
ऑनलाइन आवेदन करना होगा
उपायुक्त ने कहा, लाइसेंस प्राप्त करने के लिए विभाग की वेबसाइट hortharyana.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। फलीय पौधों के लिए 20,000 रुपये तथा फलीय पौधों से भिन्न अन्य बागवानी पौधों के लिए 10,000 रुपये लाइसेंस फीस निर्धारित की गई है। लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए फलीय पौधों की स्थिति में 10,000 रुपये तथा अन्य पौधों के लिए 5,000 रुपये फीस निर्धारित है। लाइसेंस की समाप्ति तिथि से कम से कम 30 दिन पहले नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा तथा 30 दिन की अवधि के बाद आवेदन करने पर 2,000 रुपये विलंब फीस देय होगी। यदि लाइसेंस अथवा नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो प्रसंस्करण लागत के रूप में फीस का 5 प्रतिशत काटकर शेष राशि वापस किए जाने का प्रावधान है।
लाइसेंस के लिए न्यूनतम मानक जरूरी
उपायुक्त ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त करने अथवा नवीनीकरण के लिए नर्सरी संचालक को निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करना होगा। फलीय पौधों के लिए संबंधित पौधे की ज्ञात वंशावली वाले कम से कम 25 मातृ पौधे होना आवश्यक है। इसी प्रकार, फलीय पौधों से भिन्न पौधों के लिए कम से कम 1,000 वर्ग मीटर भूमि स्वामित्व में अथवा कम से कम तीन वर्ष की अवधि के लिए पंजीकृत पट्टे पर होना आवश्यक है।
फलीय पौधों के लिए न्यूनतम एक एकड़ भूमि स्वामित्व में अथवा कम से कम 10 वर्ष की अवधि के लिए पंजीकृत पट्टे पर होना जरूरी है। नर्सरी संचालक को बागवानी विभाग के बागवानी प्रशिक्षण संस्थान/उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के किसी संस्थान अथवा राज्य कृषि/बागवानी विश्वविद्यालय से कम से कम एक सप्ताह का प्रशिक्षण प्राप्त करने का प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से मिट्टी के मृदा जनित रोगजनकों से मुक्त होने संबंधी परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
निरीक्षण के बाद जारी होगी अनुज्ञप्ति
उपायुक्त ने कहा है कि नया लाइसेंस अथवा नवीनीकरण के आवेदन के बाद सक्षम प्राधिकारी स्वयं या अधिकृत अधिकारी के माध्यम से पौधशाला का निरीक्षण करवाएगा। निरीक्षण अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रपत्र में ऑनलाइन निरीक्षण रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। निर्धारित शर्तों की पूर्ति होने पर लाइसेंस अथवा नवीनीकरण ऑनलाइन जारी किया जाएगा। लाइसेंस प्रदान करने अथवा अस्वीकार करने का आदेश आवेदन प्राप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर किया जाएगा। जारी की गई लाइसेंस पांच वर्ष के लिए वैध होगी तथा निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर अगले पांच वर्ष के लिए नवीनीकृत की जा सकेगी।
फलीय पौधों की गुणवत्ता एवं पहचान पर विशेष जोर
सतबीर सिंह ने कहा कि फलीय पौधों के मामले में नर्सरी संचालकों को लाइसेंस में निर्धारित किस्मों एवं उपकिस्मों के अनुरूप ही पौधों का व्यवसाय एवं प्रवर्धन करना होगा। विक्रय किए जाने वाले प्रत्येक फलीय पौधे पर किस्म/उपकिस्म का नाम, आयु, स्रोत तथा मूलवृंत का विवरण दर्शाने वाला जलरोधक लेबल अथवा क्यूआर कोड लगाना आवश्यक होगा। पौध सामग्री अथवा फलीय पौधे वाले प्रत्येक पैकेज या पात्र पर भी संबंधित उपकिस्म की स्पष्ट पहचान उपलब्ध करवानी होगी।
रिकॉर्ड और बिल रखना अनिवार्य
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि प्रत्येक नर्सरी स्वामी को पौधों एवं पौध सामग्री की खरीद-बिक्री का पूर्ण रिकॉर्ड रखना होगा और निरीक्षण के समय सक्षम प्राधिकारी अथवा निरीक्षण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। फलीय पौधों की नर्सरियों के लिए मूलवृंत एवं सांकुर शाखा के स्रोत सहित विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। प्रत्येक खरीदार को निर्धारित प्रपत्र में बिक्री रसीद जारी करनी होगी। इसके अतिरिक्त पौध संरक्षण उपायों तथा निरीक्षण अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों के लिए निर्धारित रजिस्टरों का भी रखरखाव करना होगा।
अपील का भी प्रावधान
उपायुक्त ने बताया कि लाइसेंस प्रदान करने अथवा नवीनीकरण से इनकार करने या लाइसेंस को निलंबित अथवा रद्द करने के आदेश से प्रभावित व्यक्ति 45 दिनों के भीतर निर्धारित वेबसाइट पर ऑनलाइन अपील कर सकता है। इसके लिए 1,000 रुपये की अप्रतिदेय अपील फीस निर्धारित की गई है।
उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक जुर्माना
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि अधिनियम अथवा नियमों के किसी प्रावधान का उल्लंघन करने अथवा अधिकृत अधिकारी को उसके कार्य के निर्वहन में बाधा डालने पर एक वर्ष तक का कारावास अथवा एक लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। यदि बिल/बीजक में उल्लिखित किस्म के अनुरूप वास्तविक पौध सामग्री उपलब्ध नहीं करवाई जाती है, तो इसे भी अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में निर्धारित दंड के साथ मुआवजे का भी प्रावधान है।
किसान केवल प्रमाणित नर्सरियों से ही खरीदें पौध एवं पौधे
उपायुक्त ने किसानों से आह्वान किया है कि वे बागवानी पौधे एवं पौध सामग्री केवल लाइसेंस प्राप्त नर्सरियों से ही खरीदें। पौधे खरीदते समय किस्म, उपकिस्म, आयु, स्रोत, मूलवृंत तथा लेबल/क्यूआर कोड की जानकारी अवश्य जांचें और खरीद की रसीद सुरक्षित रखें। गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणिक पौध सामग्री बागवानी फसलों की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए नर्सरी संचालक नियमों की पालना करते हुए गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करें तथा किसान भी पौध सामग्री खरीदते समय पूरी सावधानी बरतें।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे जिला में संचालित बागवानी पौधशालाओं को हरियाणा बागवानी पौधशाला अधिनियम, 2025 एवं हरियाणा बागवानी पौधशाला नियम, 2026 के प्रावधानों के बारे में जागरूक करें तथा नियमों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निरीक्षण एवं कार्रवाई करें।


