चंडीगढ़ : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि वो कई बार सांसद और विधायक रह चुके हैं, लेकिन जैसा जैसा दुर्व्यवहार हमें इस बार मॉनसून सत्र में झेलना पड़ा, ऐसा कभी नहीं देखा। बीजेपी सरकार ने वरिष्ठ विधायकों तक के विरुद्ध जो तानाशाही दिखाई, वह विधानसभा के इतिहास में काले अध्याय के रुप में लिखी जाएगी। ना सिर्फ़ शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले विधायकों के साथ धक्का-मुक्की की गई, बल्कि उन्हें ये तक नहीं बताया गया कि ये सब किसके आदेश पर किया गया।
हुड्डा अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भाजपा ने पूरे सत्र के दौरान सिर्फ झूठ बोला और सदन को गुमराह किया। सरकार विपक्ष के किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई और अपने ही झूठ में फंसती नजर आई।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कौशल निगम और सफाई कर्मियों को लेकर सरकार द्वारा बोले गए झूठ को तथ्यों के साथ उजागर किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव में झूठ बोलकर कौशल कर्मियों का वोट लिया और उन्हें रिटायरमेंट तक पक्का करने का चुनावी जुमला उछाला।
अब जब कांग्रेस मांग कर रही है कि भाजपा अपने चुनावी वादे को पूरा करे तो खुद मुख्यमंत्री ने सदन में कहा है कि कौशल निगम सिर्फ एक वैकल्पिक व्यवस्था है। और इसके तहत काम करने वाले कर्मियों को कभी भी नौकरी से हटाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने माना कि यह कोई पक्का रोजगार नहीं है और उन्हें किसी तरह की जॉब सिक्युरिटी नहीं दी गई है। यानी खुद ही सरकार ने अपने झूठ को सदन के जरिए पूरे प्रदेश के सामने उजागर कर दिया है।
आज कौशल कर्मियों की ऐसी हालत है कि ये ना बेरोजगार हैं, ना ये तनख्वाह-दार हैं, इनको बना दिया दिहाड़ीदार है, कौशल कर्मी युवा लाचार हैं, जिनका शोषण हो रहा बार-बार है।
इसी तरह सरकार के मंत्री ने सफाई कर्मियों पर भी बहुत बड़ा झूठ बोला। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों की मांग नहीं मानी जा सकती और 2 साल में उन्हें पक्का करने की नीति नहीं बन सकती। उन्होंने यह भी झूठ बोला कि कांग्रेस ने सिर्फ 10 साल से कार्यरत कर्मियों को पक्का करने की नीति बनाई थी।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विशेष पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बाकायदा नोटिफिकेशन दिखाते हुए बताया कि कांग्रेस कार्यकाल के दौरान 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को दो नीति ऐसी बनाई गई थी, जिनमें 3 साल से कार्यरत कर्मियों को पक्का करने का फैसला लिया था। इतना ही नहीं, इन नीतियों को हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने जायज ठहराया है। जबकि भाजपा ने हमारी नीति के तहत लगे कर्मचारियों को नौकरी से हटाने और उन्हें पक्का ना होने देने के लिए पूरा जोर लगाया था।
हुड्डा ने पूछा कि अगर कांग्रेस ऐसी नीति बना सकती है तो सफाई कर्मियों के लिए बीजेपी ऐसा क्यों नहीं कर सकती? वो इसलिए ऐसा नहीं कर रही, क्योंकि यह सरकार गरीब, दलित और पिछड़ा विरोधी है। यह उनके हक में कोई भी फैसला लेने को तैयार नहीं है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पूरे प्रदेश में कच्चे कर्मचारियों का आंदोलन चल रहा है। सरकार द्वारा सफाई कर्मियों की मांगों को अनदेखा करने के चलते पूरे प्रदेश में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान 11000 ग्रामीण और 14000 शहरी सफाईकर्मी नियुक्त किए गए थे। लेकिन बीजेपी सरकार ने आज तक उनको पक्का नहीं किया। कांग्रेस की मांग है कि इन कर्मचारियों को पक्का करने का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाए, विपक्ष में होने के बावजूद हम उसका समर्थन करेंगे.
हुड्डा ने बताया कि विधानसभा सत्र में आईडीएफसी बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक में हुए घोटालों पर चर्चा के लिए कांग्रेस प्रस्ताव लाई थी। लेकिन सरकार इस चर्चा से भागती नजर आई। सरकार ने कहा कि बैंक घोटालों से कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है। अगर ऐसा है तो 3-3 आईएएस अधिकारियों को निलंबित क्यों करना पड़ा? आखिर सरकार जांच से भागकर किसे बचाना चाहती है?
इसी तरह सरकार नौकरियों पर सदन के भीतर झूठ बोला। सरकार ने कहा कि बीजेपी कार्यकाल के दौरान कोई भर्ती रद्द नहीं हुई और भर्तियों में धांधली नहीं हुई। जबकि सच्चाई ये है कि हरियाणा के इतिहास में पहली बार बीजेपी ही ऐसी सरकार है, जिसके दौरान भर्ती बॉर्ड के भीतर लाखों रुपये पकड़े गए। यानी भर्ती संस्थाओं में बैठकर लोग नौकरियों को बेच रहे थे। इतना ही नहीं, भर्तियों में धांधली के चलते HPSC, HSSC से लेकर कौशल निगम तक को बार-बार कोर्ट से फटकार और जुर्माना पड़ा। इनपर 50 हजार से लेकर एक लाख तक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष ने कर्जे का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि बीजेपी ने हरियाणा को कर्ज में डुबो दिया है। आज प्रदेश पर 5 लाख 53 हज़ार करोड़ का कर्जा है। सरकार पूरी तरह घोटालों में डूबी हुई है। यह P-P-P-P की सरकार है यानी प्रचार, पुलिस, पोर्टल और पोलराइजेशन।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ख़ुद की आयुषमान योजना तक को ढंग से नहीं चला रही है। सरकार पर प्राइवेट अस्पतालों का 1200 करोड़ बकाया है। इसके चलते गरीबों को इलाज में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है और सरकार कागजों में ही योजना चला रही है।
इस मौके पर हुड्डा के साथ विधायक अशोक अरोड़ा ने भी अवैध कॉलोनियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं और लोगों से लाखों-करोड़ों की लूट हो रही है। जबकि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले सेक्टरों की खस्ता हालत है। बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद हुडा का नाम बदलकर एचएसवीपी तो कर दिया। लेकिन उसके विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। जबकि विकास नाम बदलने से नहीं, नियत बदलने से होता है। पहले सेक्टर्स में लॉटरी के आधार पर प्लॉट्स का आवंटन होता था, इसलिए लोगों को सस्ते में जमीन मिल जाती थी। लेकिन अब बोली के जरिए प्लॉट दिए जाते हैं और सेक्टर्स की जमीन के रेट आसमान छूने लगे हैं।


