रोहतक : पोजीट्रॉन अस्पताल, रोहतक के कुशल डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। एक गंभीर हादसे में कंधे के पास से पूरी तरह कटे हुए हाथ को जटिल और लंबी मैराथन सर्जरी के बाद सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। यह चिकित्सा जगत में एक बड़ा कीर्तिमान है, क्योंकि कंधे बांह के पास से पूरी तरह कटे हाथ को जोड़ने की यह पूरे हरियाणा प्रदेश में 8वीं और रोहतक जिले में पहली सफल रिप्लांटेशन सर्जरी है।
यह दुर्लभ और दुर्लभतम ऑपरेशन डॉ. क्षितिज ढुल (प्लास्टिक एवं माइक्रोवैस्कुलर सर्जन) और डॉ. प्रदीप कुमार (ऑर्थोपेडिक सर्जन) की अगुवाई वाली विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया। भीषण हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में पहुंचा था मरीज 26 वर्षीय मरीज (निवासी छतेहरा, गोहाना) एक भीषण दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसमें उनका दाहिना हाथ बांह के स्तर (Arm Level) से पूरी तरह कटकर शरीर से अलग हो गया था। मरीज को अत्यधिक रक्तस्राव और बेहद गंभीर हालत में पोजीट्रॉन अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। कटे हुए अंग को दोबारा जोड़ने के लिए शुरुआती कुछ घंटे (Golden Hour) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इमरजेंसी टीम ने बिना समय गंवाए मरीज को स्थिर किया और तुरंत ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया।
डॉक्टरों ने बताया कि करीब 10 घंटे मैराथन सर्जरी चली। इस दौरान बांह के स्तर पर हुए विच्छेदन (Amputation) में मांसपेशियां सबसे ज्यादा होती हैं। अगर इनमें रक्त का दौरा तुरंत शुरू न हो, तो मांसपेशियां हमेशा के लिए निर्जीव हो जाती हैं।
इस बेहद पेचीदा और बहु-स्तरीय सर्जरी के मुख्य चरण इस प्रकार रहे: हड्डी का स्थिरीकरण (Bone Fixation): ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी टीम ने सबसे पहले कटी हुई हड्डी को स्थिर कर एक मजबूत ढांचा तैयार किया। रक्त वाहिकाओं को जोड़ना (Revascularization): प्लास्टिक एवं माइक्रोवैस्कुलर सर्जन डॉ. क्षितिज ढुल ने हाई-पावर सर्जिकल माइक्रोस्कोप की मदद से बाल से भी बारीक धमनियों और नसों को आपस में जोड़कर हाथ में तुरंत रक्त प्रवाह बहाल किया। नसों और मांसपेशियों की मरम्मत (Nerve & Muscle Repair): भविष्य में हाथ में संवेदना (Sensation) और हरकत (Movement) वापस लाने के लिए प्रमुख तंत्रिकाओं (Radial, Median, Ulnar Nerves) तथा मांसपेशियों की बारीक रिपेयरिंग की गई। मरीज की स्थितिः उम्मीद और तेजी से रिकवरीसर्जरी के बाद कटे हुए हाथ में रक्त संचार पूरी तरह सामान्य हो चुका है और उंगलियों तक खून का प्रवाह सुचारू रूप से चल रहा है। मरीज की हालत स्थिर है। डॉक्टरों की देखरेख में फिजियोथेरेपी के जरिए धीरे-धीरे हाथ का मूवमेंट शुरू कराया जा रहा है, जिससे समय के साथ हाथ की कार्यक्षमता पूरी तरह वापस आ सके।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के बयान
(Quotes for Media) “माइक्रोस्कोप की मदद से कटी हुई महीन नसों और धमनियों को दोबारा जोड़ना अत्यधिक एकाग्रता का काम है। बांह के स्तर पर हाथ जोड़ने की यह सर्जरी रोहतक में पहली बार और पूरे हरियाणा में 8वीं बार सफलतापूर्वक अंजाम दी गई है। तुरंत रक्त प्रवाह शुरू होना हमारी पहली सफलता है; अब सही रिहैबिलिटेशन से समय के साथ हाथ की कार्यक्षमता लौटेगी।“- डॉ. क्षितिज ढुल, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन”
बांह के स्तर पर हाथ कटने के मामलों में समय ही सबसे बड़ा निर्णायक कारक होता है। हमारी पहली प्राथमिकता हड्डी को मजबूत आधार देकर तुरंत रक्त वाहिकाओं को जोड़ने का रास्ता साफ करना था, ताकि मांसपेशियों को निर्जीव होने से बचाया जा सके। यह एक बड़ा टीम वर्क था।” – डॉ. प्रदीप कुमार, ऑर्थोपेडिक सर्जन
जन जागरूकता के लिए
अगर शरीर का कोई अंग कट जाए तो क्या करें? अस्पताल की टीम ने आम जनता के लिए कटे हुए अंग के प्राथमिक उपचार के सही तरीके बताए हैं: खून का बहाव रोकें: कटे हुए स्थान पर साफ कपड़ा या पट्टी रखकर सीधा दबाव बनाएं, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव न हो। कटे अंग को सुरक्षित रखें (3-स्टेप विधि):
स्टेप 1: कटे हुए अंग को साफ, हल्के गीले सूती कपड़े या गॉज में लपेटें। इसे सीधे पानी में न डुबोएं।
स्टेप 2: इस कपड़े में लिपटे अंग को एक एयरटाइट (वाटरप्रूफ) प्लास्टिक की थैली या जिपलॉक बैग में रखकर अच्छी तरह बंद करें।
स्टेप 3: अब इस प्लास्टिक बैग को बर्फ और पानी से भरे कंटेनर/थैले में रखें। (ध्यान दें: कटे हुए अंग को कभी भी सीधे बर्फ पर न रखें, इससे टिशू डैमेज हो जाते हैं।) जल्द अस्पताल पहुंचें: मरीज और इस प्रकार सुरक्षित रखे अंग को जितनी जल्दी हो सके, 4 से 6 घंटे के भीतर ऐसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले जाएं जहां माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो।


