- डेयरी मोहल्ले में फिर नालियों में बह रहा गोबर, चालान के बाद भी नहीं सुधर रहे लोग
कविता. रोहतक : शहर के डेयरी मोहल्ले में गोबर एक बार फिर परेशानी का कारण बनने लगा है। पिछले दिनों नगर निगम की ओर से गोबर नालियों में बहाने वालों के चालान किए गए थे। कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक हालात सुधरे रहे, लेकिन अब फिर से लोग गोबर नालियों में बहाने लगे हैं। इससे नालियां जाम होने के साथ-साथ आसपास गंदगी और दुर्गंध का माहौल बनने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चालान की कार्रवाई के बाद कुछ दिन तक लोग नियमों का पालन करते हैं, लेकिन कार्रवाई का असर कम होते ही दोबारा वही स्थिति बन जाती है।
नालियों में गोबर से बढ़ रही परेशानी
डेयरी मोहल्ले में पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण रोजाना बड़ी मात्रा में गोबर निकलता है। इसके उचित निस्तारण के बजाय कई जगह इसे नालियों में बहाया जा रहा है। गोबर नालियों में जमा होकर पानी के बहाव को रोकता है और धीरे-धीरे नालियां गंदगी से भरने लगती हैं। इससे लोगों को जलनिकासी की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है।
बदबू और गंदगी से बिगड़ रहा माहौल
नालियों में गोबर जमा होने से आसपास दुर्गंध फैल रही है। गर्मी और उमस के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। गंदगी के कारण मक्खियां और अन्य कीट पनपने लगते हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। राहगीरों को भी गंदगी और बदबू के बीच से गुजरना पड़ता है।
नालियां जाम हुईं तो बढ़ेगा जलभराव
गोबर नालियों में बहाने का सबसे बड़ा नुकसान जलनिकासी व्यवस्था पर पड़ता है। गोबर नालियों में जमकर पानी के बहाव को बाधित कर सकता है। बारिश होने पर ऐसी नालियां जल्दी ओवरफ्लो हो सकती हैं और गलियों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ सड़क और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी फैल सकती है।
चालान से कुछ दिन सुधरते हैं हालात
नगर निगम की ओर से पहले कार्रवाई करते हुए चालान किए गए थे। इसके बाद लोगों ने कुछ समय तक गोबर नालियों में डालना बंद कर दिया था। हालांकि अब फिर से वही स्थिति दिखाई देने लगी है। इससे साफ है कि केवल चालान की कार्रवाई का असर स्थायी नहीं हो पा रहा। नियमित निगरानी और लगातार कार्रवाई की जरूरत महसूस हो रही है।
लोगों को भी समझना होगा जिम्मेदारी
डेयरी मोहल्ले की समस्या केवल नगर निगम की कार्रवाई से खत्म नहीं हो सकती। पशुपालकों को गोबर के उचित निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी और उसे नालियों में बहाने से बचना होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम को ऐसे स्थानों पर नियमित निरीक्षण करना चाहिए और नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक चालान के बाद कुछ दिन राहत और फिर वही हालात बनने का सिलसिला जारी रहेगा।


