नई दिल्ली/रोहतक : केंद्र सरकार की GOBARdhan योजना के तहत देश में Bio-Circular-Green (BCG) मॉडल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में HOMRE Ltd भी अपनी गतिविधियों के विस्तार की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी जैविक अपशिष्ट, कृषि अवशेष और बायोमास आधारित स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, HOMRE Ltd कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा और जैव-आधारित उत्पादों के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की तैयारी में है।
HOMRE Ltd पहले से ही कृषि अवशेषों से तैयार बायोमास पेलेट और ब्रिकेट्स के निर्माण एवं आपूर्ति के क्षेत्र में सक्रिय है। इन उत्पादों का इस्तेमाल औद्योगिक इकाइयों में पारंपरिक कोयला आधारित ईंधन के विकल्प के तौर पर किया जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, HOMRE Ltd मेटल रीसाइक्लिंग, वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े क्षेत्रों में भी काम कर रही है। कंपनी ने मध्य प्रदेश के मुरैना, महाराष्ट्र के बुलढाणा और राजस्थान के भरतपुर में बायोमास पेलेट उत्पादन इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
GOBARdhan और BCG मॉडल के बीच तालमेल
GOBARdhan योजना का व्यापक उद्देश्य जैविक कचरे और कृषि अवशेषों को उपयोगी संसाधनों में बदलना है। इसी अवधारणा के अनुरूप BCG मॉडल में जैविक संसाधनों के संग्रह, प्रसंस्करण और उनसे ऊर्जा सहित अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, HOMRE Ltd अपने मौजूदा बायोमास कारोबार को इसी व्यापक मॉडल से जोड़ने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक अपशिष्ट से ऊर्जा तथा अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
किसानों को मिल सकता है अवशेषों का बेहतर मूल्य
BCG मॉडल के विस्तार से कृषि अवशेषों के लिए एक संगठित बाजार विकसित होने की संभावना है। इससे किसानों को फसल अवशेषों से अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है और पराली जलाने जैसी समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अवशेषों के संग्रह, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। बड़े पैमाने पर इस मॉडल के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र, दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
उद्योगों के लिए वैकल्पिक ईंधन का बढ़ेगा दायरा
बायोमास पेलेट और ब्रिकेट्स की मांग बढ़ने से औद्योगिक क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है। कृषि अवशेषों से तैयार ईंधन पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
रोजगार और पर्यावरण को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि BCG आधारित परियोजनाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।
जानें- क्या है BCG मॉडल?
BCG यानी Bio-Circular-Green Economy ऐसा मॉडल है, जो जैविक संसाधनों के बेहतर उपयोग, कचरे के पुनर्चक्रण और हरित विकास को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट से बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद तैयार कर पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।


