चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए उन्नत किस्म के बीज अधिक से अधिक किसानों तक उपलब्ध करवाने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में निजी क्षेत्र की कम्पनी साहिब सीड्स प्राइवेट लिमिटेड, घरोंडा, करनाल के साथ हकृवि द्वारा विकसित सरसों की उन्नत किस्म आरएच 1975 व आरएचएच 2101 के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लगातार विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में विकसित की जा रही हैं। वैज्ञानिकों द्वारा ईजाद की गई उन्नत किस्में देशभर में अपना परचम लहरा रही हैं। किसानों को विश्वसनीय किस्मों का बीज एवं उपलब्ध करवा कर प्रदेश एवं देश के खाद्य उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
इन अधिकारियों ने किए हस्ताक्षर
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज की उपस्थिति में हुए समझौते पर साहिब सीड्स प्राइवेट लिमिटेड, घरोंडा, करनाल की ओर से निदेशक सुभाष खुराना ने जबकि विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने हस्ताक्षर किए। इन किस्मों की विशेषताएं
सरसों की आरएच 1975 किस्म: अनुसंधान निदेशक डॉ राजबीर गर्ग ने बताया कि आरएच 1975 किस्म 11 से 12 किवंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन तथा 14 से 15 किवंटल प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता रखने वाली किस्म है। इस किस्म में तेल कि मात्रा लगभग 39.5 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि पैदावार और तेल की मात्रा अधिक होने के कारण यह किस्म अन्य किस्मों की अपेक्षा किसानों में अधिक लोकप्रिय है।
आरएचएच 2101 किस्म: यह किस्म 142 दिन में पककर तैयार हो जाती है और 28 से 30 किवंटल प्रति हेक्टेयर तक औसत उपज देती है। इस किस्म में शाखाओं की संख्या अधिक होती है तथा प्रति फलियां में दोनों की संख्या भी ज्यादा होती है जिसके कारण इसकी उपज क्षमता अन्य उन्नत किस्मों की तुलना में अधिक है इसके दाने मध्य आकार के होते हैं और इनमें लगभग 40 प्रतिशत तेल अंश पाया जाता है।

