कैथल की डीसी अपराजिता ने स्टंबल लैब के बाद एक ओर नई पहल शुरू की है। प्यारी बेटियां नाम की इस पहल में प्रत्येक गांव से दो रोल मॉडल बेटियों का चयन किया जाएगा। जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की हो और गांव या परिवार का नाम रोशन किया हो। इन बेटियों को डीसी अपराजिता की अगुवाई में सफलता के लिए प्रेरित किया जाएगा और जिले की एक कोर टीम का गठन किया जाएगा।
यह निर्देश डीसी अपराजिता ने मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में जिले के दस सबसे अच्छे लिंगानुपात वाले और दस सबसे खराब लिंगानुपात वाले गांवों के सरपंचों के साथ हुई बैठक में जारी किए। बैठक में सरपंचों के साथ हुई चर्चा के बाद फैसला लिया गया कि जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही बेटियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
डीसी ने कहा कि जिले में इस साल का अब तक का लिंगानुपात चार माह में 890 है, जो चिंताजनक है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सरंपंचों के साथ संवाद स्थापित करते हुए कहा कि वे स्वयं जिले में बतौर डीसी काम कर रही हैं, सीएमओ महिला हैं। इसी तरह से बेटियां आज हर क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रही हैं। बेटियां किसी से भी कम नहीं हैं। डीसी ने कहा कि समाज को जागरूक करने में हरियाणा में खाप पंचायतों का अहम योगदान है। खाप पंचायतों को भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई को खत्म करने में सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।
डीसी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक रात्रि प्रवास कार्यक्रम में उस गांव की उत्कृष्ट सफलता हासिल करने वाली बेटी को सम्मानित किया जाएगा। डीसी ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसे घिनौने अपराध में यदि कोई संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
डीसी ने सरपंचों से भी फीडबैक लिया, जिसमें कई कारण सामने आए। डीसी ने सामाजिक कारणों के लिए सरपंचों, सामाजिक संस्थाओं का आह्वान किया कि लोगों को जागरूक किया जाए। साथ ही जमीनी स्तर पर अच्छा काम कर रही आशा वर्कर्स को सम्मानित किए जाने एवं खराब लिंगानुपात वाले गांवों में आशा वर्कर्स के कार्य की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई करने के भी निर्देश जारी किए।
सरपंचों ने सुझाव दिया कि जो परिवार संपन्न हैं, वे गांव में उस गरीब परिवार की बेटी को आर्थिक रूप से गोद ले सकते हैं, जिसके पास एक से अधिक बेटियां हैं। डीसी ने इस संबंध में सामाजिक जागरूकता पर जोर देते हुए सरपंचों को अपने विवेक से फैसला लेने की बात कही। कई सरपंचों ने बेटी के पैदा होने के बाद अपने स्तर पर उस परिवार को दी जाने वाली आर्थिक सहायता, दो किलो घी देने जैसी अपनी योजनाओं की भी जानकारी दी। जिसे डीसी ने सराहनीय बताया।
हर गांव से होगा प्यारी बेटियों का चयन
डीसी अपराजिता ने कहा कि जिले में प्यारी बेटियां एक योजना चलाई जाएगी। जिसमें सरपंच गांव की उन दो बेटियों का चयन करेंगे, जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलता हासिल की हो। इस तरह हर गांव से ऐसी बेटियों का चयन होगा। इन बेटियों की जिले में एक कोर टीम का गठन किया जाएगा। अलग-अलग विभागों की जानकारी देकर इन बेटियों को सफलता के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही ये बेटियां गांव में अन्य बेटियों और लोगों प्रेरणा का स्त्रोत बनेंगी।
इन गांवों में है जिले में 1000 से अधिक लिंगानुपात
जिले में गांव ककहेड़ी, ग्योंग, खरकां, फतेहपुर, कैलरम, बरटा, खरक पांडवा, हाबड़ी, मटौर और काकौत में लिंगानुपात 1000 से अधिक है। डीसी ने इन सभी गांवों के सरपंचों को शुभकामनाएं दीं और जिन दस गांवों में लिंगानुपात कम है, उन सभी गांवों के सरपंचों का भी आह्वान किया कि वे गांव में लिंगानुपात में सुधार करने में सहयोग करें। लोगों को समझाएं। यदि कहीं कोई भ्रूण हत्या करने का प्रयास करता है, उसकी सूचना प्रशासन को दें, ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके।

