चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट (ग्रुप-C) सेवा नियम, 1998 में संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य पूरे राज्य में कर्मचारियों की कमी को दूर करना और स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार करना है।
वर्ष 2021 में फार्मासिस्ट के पद का नाम बदलकर फार्मेसी अधिकारी किए जाने के बाद, न्यूनतम योग्यता को बढ़ाकर फार्मेसी में स्नातक डिग्री (Bachelor’s Degree) कर दिया गया था, साथ ही अस्पताल-आधारित फार्मेसी सेवाओं में अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त भी जोड़ दी गई थी। हालाँकि, इन कड़े मानदंडों के कारण पात्र उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो गई, जिससे सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में पद खाली रहने लगे। इस समस्या को दूर करने के लिए कैबिनेट ने सेवा नियमों से अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त को हटाने की मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि इस कदम से पात्र उम्मीदवारों का दायरा काफी बढ़ जाएगा और भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी आएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, कैबिनेट ने फार्मेसी अधिकारी के पद के लिए भर्ती अनुपात में बदलाव को मंजूरी दी है। सीधी भर्ती का हिस्सा 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पदोन्नति (promotion) का कोटा 25 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
कैबिनेट ने सेवा नियमों में संशोधित वेतनमानों को शामिल करने की भी मंजूरी दी है। फार्मेसी अधिकारियों के लिए वेतन स्तर को FPL-6 से अपडेट करके FPL-6A कर दिया गया है, जिसमें संशोधित मूल वेतन (basic pay) 39,900 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे वित्त विभाग पहले ही मंजूरी दे चुका है।

