हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं द्वारा किए जा रहे रचनात्मक एवं नवाचार आधारित कार्यों को बौद्धिक संपदा संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की शोधार्थी मीनाक्षी शर्मा द्वारा तैयार किए गए कढ़ाईदार दीवार पैनल के तीन अलग-अलग डिजाइनों को डिजाइन संरक्षण प्रदान किया गया है। मीनाक्षी शर्मा ने डॉ. पारूल गिल के मार्गदर्शन में उपरोक्त डिजाइनों को तैयार किया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने इस उपलब्धि के लिए मीनाक्षी शर्मा एवं पारुल गिल को बधाई देते हुए कहा कि रचनात्मक कार्यों एवं नए विचारों को बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित करना अनुसंधान एवं नवाचार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस शोध कार्य का मुख्य उद्देश्य हरियाणा की पारंपरिक विरासत को बढ़ावा देना, उसका संरक्षण करना तथा ऐसे पारंपरिक डिजाइनों और सांस्कृतिक तत्वों को नई पहचान दिलाना था, जिन्हें अपेक्षाकृत कम पहचान मिली है और जिनकी बाजार में उपस्थिति भी सीमित है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को नवीन विचारों और उपयोगी रचनात्मक कार्यों के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कढ़ाईदार दीवार पैनल की खासियत
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि छात्रा मीनाक्षी शर्मा द्वारा दीवार पैनल के लिए अनोखे और नए हरियाणवी डिजाइनों को विकसित किया गया है। इन डिजाइनों में हरियाणा की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक जीवनशैली को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। हरियाणवी जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे घर के कामकाज, खेती, पशुपालन, नाच-गाना, रीति-रिवाज एवं त्योहार, पारंपरिक इमारतें एवं संरचनाएं, शिल्प, खेल तथा अन्य गतिविधियों से संबंधित चित्रों और पेंटिंग्स को विभिन्न सेकेंडरी स्रोतों से एकत्रित किया गया।
इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक, डॉ. नीलम रोज व डॉ. योगेश जिंदल उपस्थित रहे।

