मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने आह्वान किया कि हरियाणा का प्रत्येक परिवार प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को गुरुग्राम के मानेसर में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव के दूसरे चरण के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्य प्राणी मंत्रीश्री राव नरबीर सिंह ने की, जबकि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन तथा पौधारोपण किया। उन्होंने उपस्थितजन को ‘एक पेड़-मां के नाम’ लगाने तथा दूसरों को भी पौधारोपण के लिए प्रेरित करने की शपथ दिलवाई। मुख्यमंत्री ने वन विभाग की पुस्तिका ‘एक पेड़-मां के नाम’ तथा ‘हरियाणा फॉरेस्ट न्यूज’ का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने ‘हरित हरियाणा’ विषय पर आयोजित निबंध, चित्रकला एवं अन्य विभिन्न प्रतियोगिताओं में गुरुग्राम जिला के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित होंगे वन महोत्सव:
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष वन महोत्सव का पहला चरण 30 जुलाई को करनाल में आयोजित किया गया था और अब दूसरे चरण की शुरुआत मानेसर से की गई है। उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष हरियाणा के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में वन महोत्सव आयोजित किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान का भागीदार बन सके।
प्रदेश में विकसित किए 75 नमो पार्क
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 75 नमो पार्क विकसित किए जा चुके हैं। प्रत्येक जिला मुख्यालय पर 5 से 100 एकड़ क्षेत्र में ऑक्सी-वन विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें पैदल पथ, साइकिल ट्रैक और नागरिकों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। करनाल में ऑक्सी-वन तैयार हो चुका है, जबकि पंचकूला में इसका निर्माण कार्य जारी है। इसके अलावा सोनीपत के मुरथल और यमुनानगर के सढ़ौरा में नगर वन विकसित किए गए हैं तथा प्रदेश के प्रत्येक गांव में ‘पंचवटी’ के नाम से पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र के 134 तीर्थ स्थलों पर पंचवटी वाटिकाओं का निर्माण भी प्रारंभ हो चुका है।
पौधों को परिवार के सदस्य की तरह संरक्षित करना आवश्यक
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे अपनी मां के नाम पर पौधा लगाकर उसे परिवार के सदस्य की तरह संरक्षित करें। उन्होंने कहा कि सरकार इस अभियान में सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, पंचायतों, नगर निकायों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करेगी।
विकास तभी सार्थक है जब प्रकृति उसके साथ मुस्कुराए
सीएम ने किसानों से खेतों की मेड़ों तथा उपलब्ध भूमि पर स्थानीय जलवायु के अनुरूप उपयोगी और स्वदेशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और मानेसर औद्योगिक विकास के प्रतीक हैं, लेकिन इनकी पहचान हरियाली और स्वच्छ वातावरण से भी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास तभी सार्थक है जब प्रकृति उसके साथ मुस्कुराए। कंक्रीट की इमारतें आर्थिक विकास दे सकती हैं, लेकिन जीवन की गहराई और शुद्ध वातावरण केवल वृक्ष ही प्रदान करते हैं।
केवल फोटो खिंचवाकर पौधा लगा देना पर्याप्त नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल फोटो खिंचवाकर पौधा लगा देना पर्याप्त नहीं है। पौधों को पानी, सुरक्षा, मिट्टी की देखभाल और नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि तीन वर्ष बाद लगाए गए पौधों में से कितने वृक्ष जीवित हैं। मुख्यमंत्री ने वन विभाग, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों से कहा कि उनका लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि उन्हें वृक्ष बनाना होना चाहिए। सही स्थान पर सही प्रजाति का चयन, नियमित देखभाल और संरक्षण ही इस अभियान की सफलता का आधार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि हरियाणा का प्रत्येक नागरिक केवल एक पौधे को भी पूरी जिम्मेदारी से वृक्ष बना दे, तो हरित हरियाणा का सपना बहुत जल्द साकार हो जाएगा। अंत में उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को वन महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराने का आह्वान किया।
अरावली संरक्षण और हरित विकास में हरियाणा बना उदाहरण: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि हरियाणा सरकार ने विशेष रूप से गुरुग्राम और एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाकर उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह की दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों पहले जिस प्रकार गुरुग्राम की अरावली पर्वतमाला को पुनः हरित बनाने और उसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने का संकल्प लिया गया था, आज वह धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के प्रयासों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा ने एनसीआर क्षेत्र में राजस्व भूमि के बड़े हिस्से को वन क्षेत्र के रूप में विकसित कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार के प्रयास आने वाले वर्षों में दूरगामी परिणाम देंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुरुग्राम आज केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला, सुल्तानपुर वेटलैंड, जिले के ग्रासलैंड तथा अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों का संरक्षण पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों के संरक्षण से भूजल स्तर में सुधार, वर्षा जल के प्राकृतिक संचयन, जैव विविधता के संवर्धन तथा स्वच्छ वातावरण को बढ़ावा मिल रहा है।
पौधारोपण तभी सफल होगा, जब हर पौधे को जीवन देने का संकल्प लिया जाए
हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि वर्षा ऋतु प्रकृति को संवारने का सबसे उपयुक्त अवसर है और प्रत्येक नागरिक को इस अभियान का सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना एक दिन का कार्य है, लेकिन उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने इस वर्ष व्यापक स्तर पर पौधारोपण के साथ-साथ प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल और संरक्षण पर विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने लगाए हुए पौधे को परिवार के सदस्य की तरह अपनाकर उसका पालन-पोषण करे, तो हरियाणा आने वाले वर्षों में अधिक हरित, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त राज्य के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनके संरक्षण का संकल्प भी लें।
वन मंत्री राव ने कहा, डिजिटल निमंत्रण अपनाकर बचाएं कागज, ईंधन और पर्यावरण
मंत्री राव ने नागरिकों से सामाजिक आयोजनों में पारंपरिक छपे हुए निमंत्रण-पत्रों के स्थान पर मोबाइल और डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कागज के लिए पेड़ों की कटाई होती है, इसलिए यदि हम डिजिटल निमंत्रण अपनाते हैं तो कागज की बचत के साथ-साथ पेड़ों का संरक्षण भी होगा। इसके अलावा कार्ड वितरित करने में लगने वाला समय, ईंधन की खपत, सड़क पर यातायात का दबाव तथा ध्वनि एवं वायु प्रदूषण भी कम होगा। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल के माध्यम से भेजा गया एक संदेश भी उतना ही प्रभावी है जितना व्यक्तिगत निमंत्रण। छोटे-छोटे बदलाव सामूहिक रूप से बड़े सकारात्मक परिणाम लाते हैं और एक स्वच्छ, हरित तथा टिकाऊ भविष्य की मजबूत नींव बनते हैं।


