कविता.रोहतक : त्योहारों का मौसम दस्तक देने वाला है। 10 अक्टूबर से रामलीला, 11 अक्टूबर से नवरात्र, 20 अक्टूबर को दशहरा और 29 अक्टूबर को करवाचौथ। यानी अक्टूबर में कैलेंडर की तारीखें कम और त्योहार ज्यादा नजर आ रहे हैं। घरों में पूजा-पाठ की तैयारी है, बाजारों में सजावट शुरू हो चुकी है और मिठाई की दुकानों पर कड़ाहियां चढ़ने लगी हैं। त्योहार आते ही सबसे पहले जिस चीज की याद आती है, वह है मिठाई। लेकिन इस बार मिठाई की दुकान पर जाने से पहले एक सवाल जरूर पूछना होगा कि जो मिठाई दिखने में इतनी लाजवाब है, क्या वह खाने के लिए भी उतनी ही सुरक्षित है। मिठाई का एक डिब्बा घर में खुशियां लेकर आए या अस्पताल का रास्ता दिखाए, यह सिर्फ स्वाद से तय नहीं होता।
खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग की हालिया कार्रवाई ने बाजार की चमक के पीछे छिपे खतरे की ओर इशारा किया है। विभाग ने पनीर, घेवर, सॉस, चटनी समेत 47 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। इनमें पनीर और घेवर के चार नमूने फेल मिले, जबकि सॉस, चटनी आदि के छह नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। यानी जिस चीज को लोग स्वाद लेकर खा चुके होंगे, उसकी गुणवत्ता की रिपोर्ट बाद में सामने आती है। यही वह बिंदु है जहां त्योहार की मिठास अचानक कड़वी लगने लगती है।
रिपोर्ट बाद में आती है
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसकी एक व्यावहारिक सीमा भी है। किसी दुकान से नमूना उठाया जाता है, उसे जांच के लिए भेजा जाता है और रिपोर्ट आने में समय लगता है। इस बीच वही खाद्य सामग्री बाजार में बिकती रहती है और लोग उसे खरीदकर खाते भी हैं। यही वजह है कि त्योहारों के सीजन में सिर्फ सरकारी सैंपलिंग के भरोसे बैठना पर्याप्त नहीं है। ग्राहक को भी अपनी तरफ से सावधानी बरतनी होगी। आखिर मिठाई खरीदने वाला व्यक्ति रिपोर्ट आने तक इंतजार तो नहीं करेगा कि अब पता चलेगा मिठाई सुरक्षित थी या नहीं। मसलन, अगर किसी दुकान के पनीर का नमूना बाद में फेल हो जाता है, तो रिपोर्ट आने से पहले बिक चुका पनीर वापस पेट से बाहर नहीं निकाला जा सकता। यही बात घेवर और दूसरी जल्दी खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं पर भी लागू होती है।
मिठाई खरीदनी ही है तो पांच बातें याद रखें
मिठाई की दुकान पर पहुंचते ही आंखों को नहीं, दिमाग को भी काम पर लगाएं। दुकान और काउंटर की साफ-सफाई देखें। खुली मिठाई पर मक्खियां या धूल नजर आए तो खरीदने से बचें। दूध और खोये से बनी मिठाई ताजी है या नहीं, इसकी जानकारी लें। बहुत तेज या असामान्य रंग वाली मिठाई को लेकर सतर्क रहें। पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीद रहे हैं तो पैकेट की सील, निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि जरूर देखें।
बाजार की मिठाई नहीं तो फिर त्योहार में खाएं क्या
इसका मतलब यह नहीं कि त्योहार पर मिठास को पूरी तरह अलविदा कह दिया जाए। विकल्प घर में ही मौजूद हैं। बाजार से किलो भर मिठाई का डिब्बा लाने की जगह घर पर कम मात्रा में मिठाई तैयार की जा सकती है। नारियल की बर्फी, बेसन के लड्डू, आटे के लड्डू, सूजी का हलवा, गुड़-तिल की मिठाई, मखाने की खीर या दूध से बनी खीर जैसे विकल्प घर में तैयार किए जा सकते हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सामग्री आपके सामने होती है और तेल, घी, दूध, खोया, चीनी या गुड़ की गुणवत्ता पर आपका नियंत्रण रहता है। घर की बनी मिठाई का मतलब यह भी नहीं कि उसे जितना चाहें उतना खाया जाए। त्योहार में मिठास जरूरी है, लेकिन मात्रा पर नियंत्रण उससे भी ज्यादा जरूरी है।
घर की मिठाई क्या पूरी तरह सेफ है
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है कि घर की बनी मिठाई को अपने आप 100 प्रतिशत सुरक्षित मान लेना भी सही नहीं है। अगर दूध, खोया, घी, सूखे मेवे या दूसरी सामग्री खराब है, तो घर की मिठाई भी नुकसान पहुंचा सकती है। फर्क यह है कि घर में सामग्री खरीदने, रखने और बनाने की प्रक्रिया पर नियंत्रण ज्यादा रहता है। साफ बर्तन, साफ पानी, अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री और सही तरीके से पकाना-रखना जरूरी है। दूध और दूध से बनी मिठाइयों को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ने से भी बचना चाहिए। यानी असली सुरक्षा सिर्फ ‘घर की बनी’ लिख देने से नहीं आती, बल्कि सामग्री से लेकर स्टोरेज तक की पूरी प्रक्रिया से आती है।
इस बार त्योहार की खरीदारी की लिस्ट बदलें
एक बड़े डिब्बे की जगह छोटी मात्रा में अलग-अलग चीजें खरीदें। दूध और खोये वाली मिठाई कम मात्रा में और ताजी खरीदें। पैक्ड सामान की तारीख और पैकेजिंग जांचें। मिठाई को खरीदने के बाद जरूरत के मुताबिक ही बाहर निकालें। घर में बनी मिठाई भी सही तरीके से ढककर और जरूरत के अनुसार ठंडी जगह पर रखें।

