कविता.रोहतक : शहर के पंडित श्रीराम शर्मा पार्क में लगे फव्वारे पिछले काफी समय से बंद पड़े हैं। कभी पार्क की खूबसूरती बढ़ाने वाले ये फव्वारे अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं। फव्वारे नहीं चलने से पार्क में आने वाले बच्चों में भी मायूसी है। पार्क की रौनक बढ़ाने के लिए लगाए गए फव्वारों की बदहाली अब व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
बताया जा रहा है कि नियमित मेंटेनेंस नहीं होने के कारण फव्वारे बंद पड़े हैं। सवाल यह है कि जब पार्क का रखरखाव जिम्मेदार विभाग की जिम्मेदारी है तो फव्वारों की समय पर सर्विस क्यों नहीं करवाई गई। लंबे समय से बंद पड़े सिस्टम की मरम्मत को लेकर अब तक गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई, यह भी समझ से परे है।
लाखों की लागत से लगाए, चलाने की सुध नहीं
पार्क को सुंदर बनाने और लोगों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से फव्वारे लगाए गए थे। लेकिन इनके रखरखाव की व्यवस्था कमजोर पड़ते ही पूरी कवायद पर सवाल उठने लगे हैं। यदि उपकरणों की समय-समय पर जांच और मरम्मत होती तो फव्वारे लंबे समय तक बंद नहीं रहते। अब सवाल यह भी है कि खराब पड़े उपकरणों की मरम्मत पर कितना खर्च आएगा और इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
अधिकारी देखते रहे, फव्वारे सूखते रहे
पार्क में रोजाना आने वाले लोगों की नजर लंबे समय से बंद फव्वारों पर पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया। क्या अधिकारियों ने पार्क का निरीक्षण नहीं किया या फिर निरीक्षण के बाद भी समस्या को नजरअंदाज कर दिया गया। फव्वारे कब से बंद हैं, इसकी जानकारी संबंधित विभाग के पास है या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है।
जल्द शुरू हों फव्वारे, लौटे पार्क की रौनक
पार्क शहरवासियों के लिए मनोरंजन और सुकून का प्रमुख स्थान है। ऐसे में यहां की सुविधाओं का नियमित रखरखाव जरूरी है। लोगों की मांग है कि प्रशासन बंद फव्वारों की तकनीकी जांच करवाकर जल्द मरम्मत कराए और भविष्य में इनके नियमित मेंटेनेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करे। आखिर जब पार्क की सुंदरता बढ़ाने के लिए फव्वारे लगाए गए हैं तो उन्हें बंद रखकर उनकी उपयोगिता खत्म क्यों की जा रही है।
आखिर कब तक यूं ही खड़े रहेंगे फव्वारे
पार्क में बंद पड़े फव्वारों को देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि इन्हें ठीक कराने के लिए आखिर कितने समय का इंतजार और करना होगा। यदि मामूली तकनीकी खराबी या पंप की समस्या के कारण फव्वारे बंद हैं तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं करवाई गई। जिम्मेदार विभाग के पास इनके रखरखाव के लिए बजट और व्यवस्था है तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा।
सुंदरता के नाम पर खर्च, रखरखाव के समय चुप्पी
पार्क की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाए गए फव्वारे तभी सार्थक हैं, जब वे नियमित रूप से संचालित हों। बंद पड़े फव्वारे न केवल पार्क की खूबसूरती को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि रखरखाव व्यवस्था की पोल भी खोल रहे हैं। प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि फव्वारे कितने समय से बंद हैं, उनकी मरम्मत के लिए क्या कार्रवाई की गई और उन्हें दोबारा शुरू करने की समयसीमा क्या है। शहरवासियों को सिर्फ आश्वासन नहीं, पार्क में फिर से चलते हुए फव्वारे चाहिए।


