Friday, August 21, 2026
Homeहरियाणारोहतकपीजीआईएमएस में एमएस की कुर्सी पर मचा घमासान, लॉबिंग तेज, नियम बनेंगे...

पीजीआईएमएस में एमएस की कुर्सी पर मचा घमासान, लॉबिंग तेज, नियम बनेंगे आधार या फिर टूटेंगे

  • दो महिला और एक पुरुष डॉक्टर लाइन में

रोहतक: पीजीआईएमएस में चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) की कुर्सी को लेकर अंदरखाने सियासी हलचल तेज हो गई है। डॉ. कुंदन मित्तल के सेवानिवृत्त होने के बाद शुरू हुई प्रशासनिक उठापटक अब लॉबिंग और जोड़-तोड़ तक पहुंच गई है। संस्थान में यह चर्चा जोरों पर है कि स्थायी चिकित्सा अधीक्षक की नियुक्ति को लेकर कई वरिष्ठ डॉक्टर सक्रिय हो गए हैं और अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार नियुक्ति नियमों के तहत होगी या फिर पहले की तरह अपवाद देखने को मिलेगा।

चार्ज बदला तो बढ़ी चर्चाएं

डॉ. कुंदन मित्तल के सेवानिवृत्त होने के बाद चिकित्सा अधीक्षक का कार्यभार पहले डॉ. सुजाता सेठी को सौंपा गया था। हालांकि महज एक-दो दिन के भीतर ही यह जिम्मेदारी उनसे लेकर मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुधीर अत्री को दे दी गई। फिलहाल गर्मियों की छुट्टियां समाप्त होने तक डॉ. अत्री ही चिकित्सा अधीक्षक का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे, जबकि डॉ. सुजाता सेठी अपने विभागाध्यक्ष के दायित्वों का निर्वहन करती रहेंगी। इस बदलाव के बाद स्थायी नियुक्ति को लेकर संस्थान में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।

एमएस की दौड़ में कई दावेदार, नामों पर गोपनीयता

सूत्रों के अनुसार चिकित्सा अधीक्षक की कुर्सी के लिए कई वरिष्ठ डॉक्टर सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी अपनी पत्नी को इस पद पर देखना चाहते हैं। इसके अलावा एक महिला विभागाध्यक्ष और एक अन्य विभागाध्यक्ष भी इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन सभी नामों की जानकारी होने के बावजूद फिलहाल उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण उनका उल्लेख नहीं किया जा रहा है। संस्थान के भीतर इन नामों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।

नियम कहते हैं विभागाध्यक्ष नहीं बन सकता एमएस

विश्वविद्यालय के प्रचलित नियमों के अनुसार किसी भी विभाग का अध्यक्ष चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि जिन डॉक्टरों के नाम चर्चा में हैं, उनमें से कुछ की दावेदारी नियमों की कसौटी पर सवालों के घेरे में आ सकती है। यदि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप अपनाई जाती है तो कई संभावित दावेदार स्वतः ही दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
*58 वर्ष की आयु भी बन सकती है बड़ी बाधा*
चिकित्सा अधीक्षक पद के लिए आयु सीमा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। नियमों के अनुसार 58 वर्ष से अधिक आयु के डॉक्टर को इस पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। चर्चा में शामिल एक महिला विभागाध्यक्ष पहले ही इस आयु सीमा को पार कर चुकी हैं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय नियमों का पालन करता है तो उनका नाम अंतिम सूची में शामिल होना मुश्किल माना जा रहा है।

डॉ. मित्तल अब एनसी मेडिकल कॉलेज में

संस्थान में यह पहला अवसर नहीं है जब चिकित्सा अधीक्षक की नियुक्ति को लेकर नियमों की चर्चा हो रही हो। इससे पहले डॉ. कुंदन मित्तल की नियुक्ति को लेकर भी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे और इस संबंध में शिकायतें भी की गई थीं। अब डॉ. मित्तल सेवानिवृत्ति के बाद एनसी मेडिकल कॉलेज, इसराना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार नियुक्ति पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार होगी।

सेटिंग’ के लिए सक्रिय हुए डॉक्टर, आकाओं के दरबार में हाजिरी

संस्थान के भीतर यह चर्चा भी है कि चिकित्सा अधीक्षक की कुर्सी हासिल करने के लिए कई डॉक्टर अपने-अपने स्तर पर प्रभावशाली लोगों से संपर्क साध रहे हैं। समर्थन जुटाने और सिफारिशों के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। यही कारण है कि पीजीआईएमएस में इन दिनों चिकित्सा अधीक्षक की नियुक्ति सबसे चर्चित विषय बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन किस नाम पर अंतिम मुहर लगाता है और क्या इस बार नियमों को प्राथमिकता मिलेगी या फिर पुरानी परंपरा दोहराई जाएगी।

RELATED NEWS
spot_img

Most Popular