कविता.रोहतक: मानसून की दस्तक के साथ ही रोहतक में लंबे समय से इंतजार कर रहे सड़क निर्माण कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है। शहर की प्रमुख दिल्ली रोड पर वर्षों बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ है।
वहीं सेक्टर-1 समेत कई इलाकों में सड़कें खोदकर नई सड़कें बनाने का काम चल रहा है। हालांकि इन कार्यों की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब बारिश का मौसम पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है। ऐसे में लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बारिश के बीच सड़क निर्माण तय समय में पूरा हो पाएगा या फिर अधूरे काम और खराब गुणवत्ता भविष्य में नई परेशानियां खड़ी करेंगे।

बारिश में निर्माण की गुणवत्ता पर सबसे बड़ा सवाल
सड़क निर्माण के लिए मजबूत आधार और परतों का पूरी तरह सूखा होना जरूरी माना जाता है। लगातार बारिश या नमी रहने पर मिट्टी और गिट्टी की परतें ठीक से सघन नहीं हो पातीं। इसके अलावा डामर भी निर्धारित तापमान और मौसम के अनुरूप ही बेहतर तरीके से सड़क पर बैठता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के दौरान किया गया निर्माण बाद में सड़क उखड़ने, दरार आने और गड्ढे बनने जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
खुदी सड़कें बन सकती हैं लोगों के लिए मुसीबत
शहर में जहां-जहां निर्माण कार्य चल रहा है, वहां सड़कें पूरी तरह खोदी जा चुकी हैं। यदि लगातार बारिश होती है और निर्माण कार्य बीच में रुक जाता है तो इन मार्गों पर कीचड़, जलभराव और फिसलन की स्थिति बन सकती है। इससे वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई इलाकों में ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।
समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो बढ़ेगी लागत
बारिश के कारण निर्माण कार्य अक्सर प्रभावित होते हैं। यदि मौसम खराब रहने से काम रुक-रुककर चलता है तो परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ जाती है। इससे निर्माण एजेंसियों की लागत बढ़ती है और आम जनता को लंबे समय तक अधूरी सड़कों की परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार दोबारा मरम्मत और सुधार कार्य पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है, जिसका बोझ अंततः सरकारी खजाने पर पड़ता है।
दिल्ली रोड और सेक्टर-1 पर लोगों की नजर
दिल्ली रोड लंबे समय से खराब हालत के कारण लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई थी। अब यहां निर्माण कार्य शुरू होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इसी तरह सेक्टर-1 में भी सड़क निर्माण जारी है। लेकिन यदि बारिश के कारण काम अधूरा रह गया तो इन इलाकों में आवागमन और अधिक कठिन हो सकता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण एजेंसियां मौसम को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संसाधनों के साथ तेजी से काम पूरा करें ताकि बार-बार परेशानी न उठानी पड़े।
योजना और मौसम के तालमेल की जरूरत
सड़क निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए मौसम सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जाता है। आमतौर पर गर्मी और शुष्क मौसम को सड़क निर्माण के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि मानसून शुरू होने के बाद ही बड़े स्तर पर सड़क निर्माण कार्य क्यों शुरू किए गए। यदि प्रशासन और संबंधित विभाग समय रहते योजना बनाकर मौसम के अनुकूल कार्य कराएं तो न केवल निर्माण की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि जनता को भी लंबे समय तक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जनता की नजर अब नतीजों पर
रोहतक के लोगों को वर्षों से बेहतर सड़कों का इंतजार रहा है। निर्माण कार्य शुरू होना निश्चित रूप से सकारात्मक कदम है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती बारिश के बीच इन परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करना है। यदि निर्माण कार्य जल्द और मानकों के अनुसार पूरा होता है तो शहर को बेहतर सड़कें मिलेंगी, लेकिन यदि बारिश के कारण काम प्रभावित हुआ तो लोगों को गड्ढों, कीचड़, ट्रैफिक जाम और बार-बार होने वाली मरम्मत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर शहरवासियों की नजर टिकी हुई है।

