हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद में विकास कार्यों की स्थिति से संबंधित एक मामले में यह स्पष्ट किया है कि प्लॉट की ई-नीलामी से पूर्व स्थल पर आवश्यक विकास कार्य पूर्णता अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि आवंटियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि विकास कार्य पूरे होने के उपरांत ही प्लॉट की नीलामी और कब्जा प्रस्तावित किया जाना अपेक्षित है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ई-नीलामी में शामिल किए जाने वाले प्लॉट्स पर सभी आवश्यक सुविधाओं का उपलब्ध होना आवश्यक है, जिससे आवंटी समय पर निर्माण कार्य आरंभ कर सकें। मामले में यह पाया गया कि दिनांक 24.11.2023 को जारी आवंटन पत्र के साथ कब्जा प्रस्तावित किया गया, जबकि स्थल पर कुछ विकास कार्य शेष थे। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि आवंटन पत्र की शर्त संख्या–5 के अनुसार 30 दिनों के भीतर कब्जा न दिए जाने की स्थिति में ब्याज देय होता है, जिसे नियमों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए।
आयोग ने यह अपेक्षा व्यक्त की कि एक सार्वजनिक विकास प्राधिकरण के रूप में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा ऐसे मामलों में ब्याज भुगतान की प्रक्रिया स्वतः और समयबद्ध रूप से अपनाई जानी चाहिए, जिससे आवंटियों को अनावश्यक रूप से किसी मंच पर जाना न पड़े। इस संदर्भ में आयोग ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की दिनांक 16.10.2025 की टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें वैधानिक उद्देश्यों के अनुरूप कार्य प्रणाली अपनाने पर बल दिया गया है।
आयोग ने बताया कि पूर्व में भी समान प्रकृति के मामलों में सभी प्रभावित आवंटियों को नियमों के अनुसार लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। वर्तमान मामले में आयोग ने यह माना कि अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत अधिकतम 5,000 रुपये तक के मुआवजे का ही प्रावधान है।
अतः हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत आयोग ने शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं, जिसका भुगतान एच.एस.वी.पी. द्वारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यह राशि प्रारंभ में प्राधिकरण द्वारा अदा की जाए तथा नियमानुसार उत्तरदायित्व निर्धारित होने के पश्चात आगे की कार्रवाई की जा सके।
आयोग ने यह स्पष्ट किया कि आवंटी, यदि चाहे, तो अधिक मुआवजे के लिए उपभोक्ता फोरम, माननीय उच्च न्यायालय अथवा अन्य सक्षम प्राधिकरण से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है। कब्जे के विषय में, अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था से संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आयोग ने समाधान की दिशा में शीघ्र आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा व्यक्त की है।
इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में विकास कार्यों की स्थिति सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्लॉट को नीलामी प्रक्रिया में सम्मिलित न किया जाए। प्रकरण की समुचित समीक्षा हेतु आयोग ने मुख्य प्रशासक, एच.एस.वी.पी. से संबंधित फाइल की मूल नोटिंग शीट तथा एस्टेट ऑफिसर, फरीदाबाद से नीलामी, आवंटन और विकास कार्यों से जुड़े अधिकारियों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि प्रक्रियागत सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

