Saturday, June 27, 2026
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पूर्व सैनिक सुनील कुमार ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल, बने सफल उद्यमी 

रोहतक : उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि गांव खरखड़ा के पूर्व सैनिक सुनील कुमार ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है कि सफल उद्यमी बनने में उम्र कोई बाधा नहीं है। भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति निधि का सदुपयोग करते हुए मत्स्य पालन व्यवसाय अपनाया और आज एक सफल मत्स्य उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

45 वर्षीय सुनील कुमार पुत्र वजीर सिंह, दसवीं तक शिक्षित हैं। वर्ष 2017 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के बाद उन्होंने मत्स्य पालन को अपना भविष्य बनाया। मत्स्य पालन की शुरुआत से पहले उन्होंने मत्स्य पालन विभाग से मीठे पानी की मछली पालन की तकनीकी जानकारी प्राप्त की तथा एआरटीआई, हिसार से विशेष प्रशिक्षण हासिल किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वैज्ञानिक ढंग से तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, पोषण प्रबंधन और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की जानकारी दी गई।

वर्ष 2020 में उन्होंने गांव खरखड़ा स्थित अपने दो एकड़ के तालाब में मत्स्य पालन शुरू किया। उन्होंने तालाब में 10 से 12 हजार भारतीय प्रमुख कार्प (आईएमसी) मत्स्य बीज का संचयन किया। वैज्ञानिक पद्धति अपनाने और मत्स्य पालन विभाग के निरंतर मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप आज वह प्रतिवर्ष लगभग 8 मीट्रिक टन मछली उत्पादन कर रहे हैं तथा सभी खर्चों के बाद लगभग चार लाख रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं। सुनील कुमार अपनी सफलता का श्रेय मत्स्य पालन विभाग को देते हैं। उनका कहना है कि विभाग द्वारा समय-समय पर प्रदान की गई तकनीकी जानकारी, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रहा है।

आज सुनील कुमार न केवल स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य पूर्व सैनिकों और युवाओं को भी मत्स्य पालन को लाभदायक एवं सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक, उचित प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए तो मत्स्य पालन रोजगार और आय का एक उत्कृष्ट माध्यम बन सकता है। सुनील कुमार की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, सही मार्गदर्शन और मेहनत के बल पर सेवानिवृत्ति के बाद भी एक नई पहचान बनाई जा सकती है। उनकी उपलब्धि आज जिले के युवाओं और पूर्व सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना नीली क्रांति को दे रही नई गति : उपायुक्त

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश के ब्लू रिवोल्यूशन को नई गति प्रदान कर रही है। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य देश में मत्स्य पालन क्षेत्र का समग्र विकास करना है।

सचिन गुप्ता ने बताया कि इस योजना के माध्यम से मछली उत्पादन बढ़ाने, मछुआरों की आय में वृद्धि करने तथा रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत आधुनिक मत्स्य पालन, कोल्ड स्टोरेज, मछली परिवहन, प्रसंस्करण तथा विपणन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। साथ ही मछुआरों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है।

जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के माध्यम से भारत को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए। योजना के तहत मीठे एवं खारे पानी के तालाब बनाकर मत्स्य पालन पर अनुदान प्रदान किया जाता है।

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