कविता.रोहतक : नशे का कारोबार लगातार चिंता बढ़ा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आए दिन हेरोइन, चरस और दूसरे मादक पदार्थों के साथ तस्करों की गिरफ्तारी हो रही है। पुलिस की कार्रवाई से यह जरूर साफ हो रहा है कि नशे का नेटवर्क जमीन पर सक्रिय है, लेकिन इन गिरफ्तारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी अपनी जगह खड़ा है कि आखिर नशे की खेप रोहतक तक पहुंच कौन रहा है।
हाल के दिनों में इस नेटवर्क में महिलाओं की भूमिका भी सामने आई है। एक दिन पहले ही रैनकपुरा और महम क्षेत्र से दो महिलाओं को हेरोइन के साथ पकड़ा गया। महिलाओं का तस्करी में इस्तेमाल इसलिए भी तस्करों के लिए आसान रास्ता माना जा सकता है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में उन पर नशीले पदार्थ ले जाने का शक कम किया जाता है। ऐसे में महिलाओं को आगे कर असली सप्लायर खुद पीछे रहने की कोशिश कर रहे हैं।
छोटे मोहरे लगातार पुलिस के हाथ, बड़े खिलाड़ी अब भी पर्दे के पीछे
रोहतक में नशे के साथ पकड़े जा रहे लोगों को देखें तो पुलिस की कार्रवाई लगातार सामने आ रही है। कोई हेरोइन के साथ पकड़ा जा रहा है तो किसी के कब्जे से चरस बरामद हो रही है। गिरफ्तारियां यह बताने के लिए काफी हैं कि शहर में नशे की सप्लाई किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक नेटवर्क काम कर रहा है। सवाल यह है कि पुलिस जिन लोगों को पकड़ रही है, क्या उनसे पूछताछ के बाद उस व्यक्ति तक भी पहुंचा जा रहा है, जिसने माल उपलब्ध कराया था। अगर हर बार गिरफ्तारी सिर्फ सड़क पर नशा लेकर घूम रहे व्यक्ति तक सीमित रह गई तो नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना मुश्किल होगा।
महिलाओं को बनाया जा रहा ढाल, शक से बचने का नया तरीका
नशे की तस्करी में महिलाओं की मौजूदगी सामने आना जांच का अलग एंगल खोलता है। तस्कर जानते हैं कि आमतौर पर महिला को देखकर नशीले पदार्थ की तस्करी का शक कम किया जाता है। यही वजह हो सकती है कि सप्लाई चेन में महिलाओं को आगे किया जा रहा हो। रैनकपुरा और महम में महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद इस पहलू की गंभीरता से जांच जरूरी है कि वे खुद इस कारोबार में शामिल थीं या किसी बड़े नेटवर्क के लिए सिर्फ डिलीवरी का काम कर रही थीं। अगर महिलाएं केवल मोहरा हैं तो उनके पीछे मौजूद असली चेहरे तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।
हेरोइन और चरस रोहतक में पहुंच कौन रहा है
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ नशा पकड़ना नहीं, बल्कि उसकी सप्लाई लाइन को तोड़ना है। आखिर हेरोइन की खेप रोहतक तक कहां से आ रही है। कौन इसकी सप्लाई कर रहा है। पैसा किसके पास पहुंच रहा है और स्थानीय स्तर पर इसे आगे कौन बांट रहा है। जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक एक तस्कर पकड़े जाने के बाद उसकी जगह दूसरा चेहरा सामने आने की आशंका बनी रहेगी। नशे के खिलाफ असली कार्रवाई गिरफ्तारी की संख्या नहीं, बल्कि सप्लाई चेन के टूटने से दिखाई देगी।
युवा निशाने पर, मोहल्लों तक पहुंच रहा नशा
नशे का कारोबार केवल पुलिस और तस्करों का मामला नहीं रह गया है। इसका सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ता है। जब नशीला पदार्थ शहर के अलग-अलग हिस्सों तक आसानी से पहुंचने लगे तो इसका मतलब है कि सप्लाई नेटवर्क ने अपने ग्राहक और रास्ते दोनों तलाश लिए हैं। यही वजह है कि स्कूल-कॉलेज के आसपास, कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों में नशे की पहुंच को लेकर लगातार निगरानी जरूरी है। परिवारों के लिए भी यह चिंता का विषय है कि नशे की शुरुआत कब और किस रास्ते से युवाओं तक पहुंच रही है।
गिरफ्तारी से आगे बढ़कर नेटवर्क पर वार जरूरी
नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जरूरी है, लेकिन अब कार्रवाई का अगला स्तर भी तय करना होगा। छोटे तस्करों और कैरियर को पकड़ने के साथ उस नेटवर्क की आर्थिक और सप्लाई कड़ी तक पहुंचना जरूरी है। मोबाइल संपर्क, पैसों के लेनदेन, सप्लाई के स्रोत और बार-बार सामने आ रहे नामों की कड़ियां जोड़कर बड़े सप्लायर तक पहुंचा जा सकता है। वरना कहानी वही रहेगी कि आज एक तस्कर गिरफ्तार, कल दूसरा तैयार। रोहतक को छोटे मोहरों की गिरफ्तारी नहीं, नशे के पूरे नेटवर्क के अंत की जरूरत है।


