Wednesday, September 16, 2026
Homeहरियाणारोहतकआंगनबाड़ी वर्कर्स की जेब पर दोहरी मार: किराया भी जेब से, सिलेंडर...

आंगनबाड़ी वर्कर्स की जेब पर दोहरी मार: किराया भी जेब से, सिलेंडर का खर्च भी खुद उठाने का आरोप

कविता.रोहतक: आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करने वाली वर्कर्स इन दिनों अलग तरह की आर्थिक परेशानी से जूझ रही हैं। वर्कर्स का कहना है कि केंद्रों का किराया सरकार की ओर से सीधे मकान मालिकों के खाते में भेजा जा रहा है, जबकि कई वर्कर्स पहले ही अपनी जेब से मकान का किराया चुका चुकी हैं।

ऐसे में अब उनके सामने भुगतान की गई रकम वापस लेने की समस्या खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं, केंद्रों पर खाना बनाने और अन्य काम के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर भी कई बार वर्कर्स को अपने पैसे से भरवाने पड़ रहे हैं।

पहले अपनी जेब से देती हैं किराया, अब सीधे मकान मालिक को पहुंच रहा पैसा

आंगनबाड़ी वर्कर्स का कहना है कि केंद्र चलाने के लिए मकान किराए पर लेना पड़ता है। कई मामलों में वर्कर्स को मकान मालिक को समय पर किराया देना पड़ता है, इसलिए वे पहले ही अपनी जेब से भुगतान कर देती हैं। अब सरकार की ओर से किराए की राशि सीधे मकान मालिक के खाते में भेजे जाने से वर्कर्स की ओर से पहले दी गई रकम का हिसाब अटक रहा है। वर्कर्स का कहना है कि जब केंद्र उनके माध्यम से संचालित हो रहा है और किराए का भुगतान भी कई बार उन्हें ही करना पड़ता है, तो किराए की राशि उनके खाते में भेजी जानी चाहिए।

सरकारी मानदंड से ज्यादा किराया, मजबूरी में महंगा मकान लेना पड़ता है

वर्कर्स के सामने दूसरी परेशानी यह है कि हर इलाके में सरकारी मानदंड के अनुसार किराए पर मकान उपलब्ध नहीं होता। कई बार आंगनबाड़ी केंद्र के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिलने पर वर्कर्स को निर्धारित राशि से अधिक किराए वाला मकान लेना पड़ता है। उनका कहना है कि बच्चों और महिलाओं की सुविधा को देखते हुए केंद्र के लिए सही जगह जरूरी होती है। ऐसे में मकान मालिक की ओर से तय किराया देना पड़ता है। वर्कर्स चाहती हैं कि इस वास्तविक स्थिति को देखते हुए किराया भुगतान की प्रक्रिया सरल की जाए और अतिरिक्त खर्च का बोझ उन पर न पड़े।

सिलेंडर भी अपने खर्च पर भरवा रहीं, भुगतान का इंतजार

आंगनबाड़ी केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर को लेकर भी वर्कर्स ने परेशानी बताई है। उनका कहना है कि कई बार सिलेंडर खत्म होने पर केंद्र का काम प्रभावित न हो, इसलिए वे अपनी जेब से गैस सिलेंडर भरवा लेती हैं। इसके बाद भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है और कई मामलों में भुगतान समय पर नहीं मिलता। वर्कर्स का कहना है कि किराए के साथ-साथ सिलेंडर का खर्च भी उनकी जेब पर पड़ रहा है। उनकी मांग है कि केंद्र संचालन से जुड़े जरूरी खर्चों का भुगतान समय पर किया जाए, ताकि उन्हें अपनी कमाई से यह खर्च न उठाना पड़े।

RELATED NEWS
spot_img

Most Popular