गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक : कभी रौनक और भीड़ से गुलजार रहने वाला सुखपुरा चौक आज सन्नाटे की चादर ओढ़े नजर आ रहा है। यहां बन रहा फ्लाईओवर, जो विकास की उम्मीद लेकर शुरू हुआ था, अब देरी और अव्यवस्था की मिसाल बन चुका है। मार्च 2024 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को तय समय में पूरा होना था, लेकिन समयसीमा बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
इसका सीधा असर चौक के कारोबार पर पड़ा है। टूटी सड़कों, बंद रास्तों और लगातार चल रहे निर्माण के कारण ग्राहकों का आना लगभग बंद हो गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि व्यापारी अब दुकानें छोड़ने को मजबूर हैं। बाजार में हर कुछ दुकानों के बाद किराए के लिए खाली के बोर्ड नजर आते हैं। जो चौक कभी रोशनी और ग्राहकों की चहल-पहल से चमकता था, वहीं अब कम लोग नजर आ रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द काम पूरा नहीं हुआ तो उनका व्यवसाय पूरी तरह खत्म हो जाएगा। कई लोग पहले ही अपना सामान समेट चुके हैं और बाकी भी इसी राह पर हैं।
अव्यवस्था ने तोड़ी बाजार की कमर
निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। पहले सड़कों को तोड़ा गया, फिर रास्तों को बंद कर दिया गया, लेकिन उसके बाद कोई ठोस प्रबंधन नजर नहीं आया। न वैकल्पिक मार्ग बनाए गए और न ही ट्रैफिक को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई। इसका नतीजा यह हुआ कि ग्राहक बाजार तक पहुंच ही नहीं पा रहे। दुकानदारों का कहना है कि महीनों से बिक्री बेहद कम या शून्य के करीब है, जिससे किराया और खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
खुले गड्ढे बने खतरा
चौक पर सुरक्षा इंतजाम भी गंभीर सवालों के घेरे में हैं। पानी की पाइपलाइन के लिए खोदा गया गड्ढा पिछले दिनों खुला पड़ा था। न तो उसे ढका गया और न ही आसपास कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक इसमें बच्चे और पशु गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक निष्क्रिय हैं। लोगों का कहना है कि यहां किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
जवाबदेही से बचता प्रशासन
निर्धारित समय सीमा पार होने के बाद भी निर्माण एजेंसी पर सवाल उठना लाजीमि है। देरी के कारणों को सार्वजनिक भी नहीं किया गया। स्थानीय व्यापारियों का सवाल है कि उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो सुखपुरा चौक का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
प्रोजेक्ट एक नजर में
- निर्माण शुरू: मार्च 2024
- प्रस्तावित समय सीमा: 18 महीने
- लंबाई: करीब 1.175 किलोमीटर
- लागत: लगभग 65.88 करोड़ रुपये
- 40 पिलर लगाए जाने हैं
- सुविधाएं: सर्विस रोड और पार्किंग की व्यवस्था

