मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को समालखा, पानीपत के सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र के वार्षिक स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कहा कि यह वार्षिक स्थापना दिवस सेवा, साधना और समर्पण के उस विराट संकल्प का उत्सव है, जो समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र से जुड़े उन सभी लाखों परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि, लोगों ने अपने श्रम, सहयोग, त्याग और समर्पण से इस महान प्रकल्प को आकार दिया है। जब समाज स्वयं अपने विकास का संकल्प लेता है, तब परिवर्तन केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि पीढ़ियों तक जारी रहता है।
मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं से अपील की कि अपने गांवों को आत्मनिर्भर बनाएं, युवाओं को सक्षम बनाएं, किसानों को समृद्ध बनाएं, बच्चों को अवसर दें और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान दें।
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में विकसित भारत का जो संकल्प देश ने लिया है, उसकी सबसे मजबूत नींव हमारे गांव ही हैं। विकसित भारत का मार्ग विकसित गांवों से होकर गुजरता है। यह केंद्र एक भवन या संस्था नहीं बल्कि, आत्मनिर्भर भारत का एक जीवंत मॉडल दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यह हम सबके लिए गर्व का विषय है कि यह केंद्र आसपास के 100 गांवों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह गांवों के भविष्य को संवारने का संकल्प है। यह प्रयास उन गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां शिक्षा, कौशल, कृषि, स्वास्थ्य, खेल, संस्कृति और रोजगार के सभी आयामों पर एक साथ कार्य किया जा रहा है। यह केंद्र सेवा, साधना और ग्राम विकास की त्रिवेणी के रूप में स्थापित किया गया है। सेवा वह शक्ति है, जो समाज को जोड़ती है। साधना वह ऊर्जा है, जो व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचाती है और ग्राम विकास वह माध्यम है, जो राष्ट्र निर्माण की नींव को मजबूत करता है। जब ये तीनों धाराएं एक साथ प्रवाहित होती हैं, तब समाज में विकास के साथ एक नई चेतना का जन्म भी होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें सदैव वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देती आई है। हमारी परंपरा हमें सिखाती है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए, यह केंद्र एक भूमि, एक परिवार और एक भविष्य’ की अवधारणा पर काम कर रहा है। यह विचार भारतीय जीवन दर्शन का सार है। जब हम भूमि को माता मानते हैं। समाज को परिवार मानते हैं और भविष्य को साझा जिम्मेदारी मानते हैं, तभी सच्चे अर्थों में सतत विकास संभव हो पाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व तेजी से बदल रहा है। तकनीक, नवाचार और आधुनिकता के इस दौर में सबसे बड़ी आवश्यकता है कि हमारे युवाओं को समय की मांग के अनुसार कौशल प्रशिक्षण मिले। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि यहां कौशल विकास केंद्र की स्थापना की गई है। इतना ही नहीं, इसके लिए श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के साथ कौशल प्रशिक्षण के लिए समझौता भी किया गया है। यह केंद्र हजारों युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि इस केंद्र में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आज पूरी दुनिया रसायन मुक्त खेती की ओर बढ़ रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है। हरियाणा सरकार भी इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्राकृतिक खेती केवल खेती की तकनीक नहीं है, बल्कि धरती माता के प्रति हमारा दायित्व भी है। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और किसानों की लागत भी कम होती है। प्राकृतिक खेती करने वाले पात्र किसानों के लिए देसी गाय पर मिलने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वित्त वर्ष के बजट में कई ठोस निर्णय लिये हैं। इसी दिशा में एपीडा प्रमाणित प्राकृतिक एवं जैविक किसानों को 5 वर्षों तक प्रति वर्ष 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2 हजार एकड़ क्षेत्र में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ योजना प्रारंभ की जाएगी।
श्री माधव जन सेवा न्यास के अध्यक्ष पवन जिंदल ने मुख्यमंत्री का वहां पहुंचने पर स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने संस्थान में पहुंचने पर भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम से किया गया। इस मौके पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा,पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज,समालखा के विधायक मनमोहन भडाना भी उपस्थित रहे।

