- चालान की रफ्तार तेज, शिफ्टिंग की चाल सुस्त
- गोबर से जाम हो रहीं शहर की सीवर लाइनें
- कन्हेली कॉम्प्लेक्स क्यों नहीं बन पाया पहली पसंद
कविता.रोहतक : डेयरियों से फैल रही गंदगी एक बार फिर चर्चा में है। नगर निगम ने मंगलवार को 10 डेयरी संचालकों के चालान काटकर 46 हजार रुपये का जुर्माना वसूला और 15 डेयरियों को सीलिंग नोटिस जारी किए, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल चालान काटने से समस्या खत्म हो जाएगी।
वर्षों से शहर को डेयरियों से मुक्त कराने की बातें हो रही हैं, मगर हालात जस के तस बने हुए हैं। नालों और सीवरों में बहता गोबर, गलियों में फैलती बदबू और बार-बार जाम होती सीवर लाइनें इस बात की गवाही दे रही हैं कि कार्रवाई और समाधान के बीच अब भी लंबी दूरी है।
कार्रवाई हर साल, नतीजे अब तक नहीं
डेयरियों पर कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। निगम पहले भी नोटिस देता रहा है, चालान करता रहा है और डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की चेतावनी भी देता रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में डेयरियां आज भी रिहायशी इलाकों और बाजारों के आसपास संचालित हो रही हैं। यही वजह है कि हर कुछ महीनों बाद वही समस्या और वही कार्रवाई फिर सुर्खियां बन जाती है।
कॉम्प्लेक्स बना, लेकिन भरोसा नहीं बना
कन्हेली रोड पर डेयरी कॉम्प्लेक्स का निर्माण इस उम्मीद से किया गया था कि शहर को डेयरियों से राहत मिलेगी। प्लॉटों का आवंटन भी वर्षों पहले कर दिया गया था, लेकिन आज तक सभी डेयरियां वहां नहीं पहुंच सकीं। डेयरी संचालकों का कहना है कि कॉम्प्लेक्स में बुनियादी सुविधाएं पूरी नहीं हैं। सड़क, पानी, निकासी और अन्य व्यवस्थाओं की कमी के कारण वे अपने कारोबार को वहां स्थानांतरित करने में हिचक रहे हैं।
सीवरों में बह रहा गोबर, जनता परेशान
डेयरियों से निकलने वाला गोबर और गंदा पानी शहर की सीवर व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ा रहा है। कई क्षेत्रों में सीवर जाम होने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। बदबू और गंदगी के कारण आसपास रहने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सफाई व्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
दो पक्ष आमने-सामने, समाधान बीच में अटका
नगर निगम का तर्क है कि डेयरी संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे, जबकि संचालकों का कहना है कि उन्हें अधूरी सुविधाओं वाले परिसर में भेजा जा रहा है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं, लेकिन शहर की जनता के लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। समस्या वहीं की वहीं है और समाधान का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
जिम्मेदार कौन
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल जवाबदेही का है। यदि डेयरी कॉम्प्लेक्स तैयार नहीं है तो इसे पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी है, और यदि सुविधाएं उपलब्ध हैं तो फिर डेयरियां वहां क्यों नहीं जा रहीं। जब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक चालान और नोटिस केवल औपचारिक कार्रवाई बनकर रह जाएंगे। शहरवासियों को अब कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान का इंतजार है।

