- नगर निगम की सख्ती पर उठे सवाल, कन्हैली रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स में सुविधाएं अधूरी तो डेयरी संचालक जाएं कहां*
- गोबर नालों में बहा तो एक लाख का चालान, अब सीलिंग की तैयारी
कविता.रोहतक: डेयरियों से निकलने वाले गोबर और गंदगी को लेकर नगर निगम ने एक बार फिर सख्ती शुरू कर दी है। माल गोदाम रोड पर कार्रवाई करते हुए निगम की टीम ने नालों और सीवर में गोबर बहाने वाले दो डेयरी संचालकों के एक लाख रुपये के चालान किए।
निगम ने साफ कर दिया है कि रविवार तक व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो सोमवार को डेयरियों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। निगम का तर्क है कि गोबर के कारण दुर्गंध, गंदगी, जलभराव और लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। सवाल यह है कि जब शहर में डेयरियों को व्यवस्थित तरीके से शिफ्ट करने की योजना ही पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाई है तो केवल चालान और सीलिंग से समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा।
सालों से डेयरियों की शिफ्टिंग का मुद्दा, लेकिन समाधान अधूरा
शहर के रिहायशी इलाकों में चल रही डेयरियां लंबे समय से नगर निगम के लिए चुनौती बनी हुई हैं। निगम कभी नोटिस देता है तो कभी चालान और सीलिंग की कार्रवाई की चेतावनी जारी होती है। दूसरी तरफ डेयरी संचालकों का कहना है कि उन्हें शहर से बाहर या निर्धारित डेयरी कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट करने की व्यवस्था पहले पूरी की जाए। जब तक वैकल्पिक जगह पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक डेयरी संचालकों को अचानक शिफ्ट करना आसान नहीं होगा। ऐसे में हर कुछ समय बाद शुरू होने वाली कार्रवाई समस्या का स्थायी समाधान कम और टकराव का कारण ज्यादा बनती दिखाई देती है।
कन्हैली रोड का डेयरी कॉम्प्लेक्स, सुविधाएं पूरी नहीं तो शिफ्टिंग कैसे
डेयरियों को शहर से बाहर व्यवस्थित करने के लिए कन्हैली रोड पर डेयरी कॉम्प्लेक्स बनाया गया है, लेकिन यहां सुविधाओं को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं। डेयरी संचालकों की सबसे बड़ी दलील यही है कि यदि उन्हें शिफ्ट किया जाना है तो नई जगह पर पानी, सड़क, सीवर, निकासी, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराई जाएं। केवल जगह उपलब्ध करा देने से डेयरी चलाना संभव नहीं है। ऐसे में निगम को यह भी बताना होगा कि कन्हैली रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स में वर्तमान में कितनी डेयरियां शिफ्ट हो चुकी हैं, कितनी जगह खाली है और वहां डेयरी संचालन के लिए जरूरी सुविधाएं किस स्तर तक उपलब्ध हैं।
निगम की कार्रवाई जायज, लेकिन अपनी जिम्मेदारी का क्या
डेयरियों का गोबर नालों और सीवर में बहाना किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। इससे शहर की सफाई व्यवस्था और जल निकासी प्रभावित होती है और आम लोगों को परेशानी होती है। लेकिन इसके साथ ही नगर निगम की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। यदि निगम डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करना चाहता है तो उसे वैकल्पिक व्यवस्था को पूरी तरह तैयार करना होगा। डेयरी संचालकों को नोटिस, चालान और सीलिंग की चेतावनी देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिफ्टिंग के लिए व्यावहारिक और सुविधाजनक विकल्प मौजूद हो। आखिर सिर्फ डेयरी संचालक ही जिम्मेदार हैं या व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी निगम की भी है।
चालान कब तक, शिफ्टिंग की तारीख कब
नगर निगम की कार्रवाई से कुछ समय के लिए सड़कों और नालों में गोबर बहाने की समस्या पर लगाम लग सकती है, लेकिन शहर को डेयरियों की गंदगी से स्थायी राहत तभी मिलेगी जब शिफ्टिंग की योजना पूरी तरह लागू हो। निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि कन्हैली रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स को कब तक पूरी सुविधाओं से लैस किया जाएगा और शहर में बची हुई डेयरियों को वहां शिफ्ट करने की समयसीमा क्या है। हर बार चालान काटना और सीलिंग की चेतावनी देना आसान है, लेकिन असली चुनौती डेयरियों को ऐसी जगह बसाने की है जहां संचालक भी आसानी से काम कर सकें और शहर के लोगों को भी गंदगी, दुर्गंध और जलभराव से राहत मिल सके। रोहतक अब यही जवाब मांग रहा है कि डेयरियों के चालान तो फिर शुरू हो गए, लेकिन डेयरी शिफ्टिंग कब शुरू होगी।


