Thursday, August 13, 2026
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रोहतक में ‘चालान ड्रामा’ शुरू: सालभर बिकती रही पॉलिथीन, निगम को सिर्फ ‘रेड और रसीद’ से मतलब

गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक

शहर में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का खेल किसी से छिपा नहीं है। सब्जी मंडी से लेकर किराना दुकानों, डेयरियों, रेहड़ियों और बड़े बाजारों तक हर जगह खुलेआम प्रतिबंधित पॉलिथीन और प्लास्टिक सामग्री इस्तेमाल हो रही है। लेकिन नगर निगम को यह सब पूरे साल नजर नहीं आता। निगम तब जागता है जब चालान काटने का अभियान चलाना होता है। कुछ दिन कार्रवाई होती है, फोटो खिंचते हैं, प्रेस नोट जारी होते हैं और फिर सबकुछ पहले जैसा हो जाता है।

एक दिन पहले नगर निगम की टीम अचानक बाजार में उतरी और चार प्रतिष्ठानों के 55 हजार रुपये के चालान काट दिए। कार्रवाई प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री के उपयोग, भंडारण और बिक्री को लेकर की गई। लेकिन सवाल यह है कि जो प्लास्टिक महीनों से खुलेआम बिक रही थी, वह तब तक अधिकारियों को क्यों नहीं दिखी? क्या शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक सिर्फ उसी दिन दिखाई देती है जिस दिन चालान काटने निकलना होता है?

जिला उपायुक्त सचिन गुप्ता का कहना है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक पर्यावरण और सफाई व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। इससे नालियां जाम होती हैं, जलभराव बढ़ता है और प्रदूषण फैलता है। लेकिन लोगों का कहना है कि जब कार्रवाई करनी होती है तभी प्रशासन को ये नुकसान याद आते हैं। बाकी दिनों में शहर में जहरीली पॉलिथीन का कारोबार बिना किसी रोकटोक चलता रहता है।

बाजारों में दुकानदार खुलेआम ग्राहकों को प्रतिबंधित पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि जब सप्लाई खुलेआम आ रही है और कोई नियमित जांच नहीं होती तो वे भी मजबूरी में उसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं आम लोगों का सवाल है कि अगर प्लास्टिक इतनी खतरनाक है तो इसे शहर में आने कौन दे रहा है? केवल छोटे दुकानदारों पर चालान काटने से क्या समस्या खत्म हो जाएगी?

असल तस्वीर यह है कि निगम की कार्रवाई व्यवस्था सुधारने से ज्यादा खानापूर्ति जैसी नजर आती है। शहर में न तो लगातार मॉनिटरिंग होती है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया गया। प्लास्टिक बंद करने की जिम्मेदारी सिर्फ दुकानदारों पर डाल दी गई, जबकि प्रशासन ने न जागरूकता बढ़ाई और न ही सस्ती वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई।

चालान से ज्यादा जरूरी लगातार निगरानी

शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कोई छिपी हुई चीज नहीं है। हर बाजार में खुलेआम इसका प्रयोग हो रहा है। ऐसे में अचानक एक दिन कार्रवाई कर देना और फिर महीनों तक गायब रहना सवाल खड़े करता है। यदि निगम वास्तव में प्लास्टिक बंद करना चाहता है तो नियमित जांच, सप्लाई चैन पर कार्रवाई और बाजार स्तर पर निगरानी जरूरी है। वरना यह अभियान सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा।

छोटे दुकानदारों पर डंडा, बड़े सप्लायरों पर खामोशी

नगर निगम की कार्रवाई अक्सर दुकानों और रेहड़ियों तक सीमित रहती है। लेकिन शहर में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित प्लास्टिक पहुंचाने वाले सप्लायर और थोक कारोबारी आसानी से बच निकलते हैं। जब तक सप्लाई चेन पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बाजार से सिंगल यूज प्लास्टिक खत्म होना मुश्किल है। छोटे दुकानदारों पर चालान काटने से तस्वीर नहीं बदलेगी।

नालियां जाम, जलभराव और बीमारी की बड़ी वजह

प्रतिबंधित पॉलिथीन शहर की सफाई व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। यही पॉलिथीन नालियों और सीवर लाइनों में फंसकर जल निकासी रोकती है। बारिश के दौरान जलभराव की बड़ी वजह यही प्लास्टिक बनती है। गंदा पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं और बीमारियों का खतरा बढ़ता है। बावजूद इसके शहर में प्लास्टिक का इस्तेमाल लगातार जारी है।

जनता पूछ रही- प्रतिबंध है तो बाजार में बिक कैसे रही

लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया हुआ है तो फिर यह बाजारों तक पहुंच कैसे रही है। खुलेआम पॉलिथीन बिक रही है, दुकानों तक सप्लाई हो रही है और कोई रोक नहीं है। ऐसे में केवल चालान काटकर जिम्मेदारी पूरी करना लोगों को दिखावटी कार्रवाई लग रहा है।

जागरूकता के बिना नहीं रुकेगा प्लास्टिक का इस्तेमाल

सिर्फ जुर्माना लगाने से सिंगल यूज प्लास्टिक बंद नहीं होगी। लोगों और दुकानदारों को इसके नुकसान समझाने होंगे। साथ ही कपड़े और कागज के सस्ते विकल्प बाजार में उपलब्ध कराने होंगे। जब तक प्रशासन जागरूकता और वैकल्पिक व्यवस्था पर काम नहीं करेगा, तब तक प्लास्टिक बंद करने के दावे जमीन पर असर नहीं दिखाएंगे।

इसलिए खतरनाक सिंगल यूज प्लास्टिक

सिंगल यूज प्लास्टिक वह प्लास्टिक होती है जिसका इस्तेमाल केवल एक बार किया जाता है और फिर उसे फेंक दिया जाता है। इसमें पॉलिथीन बैग, प्लास्टिक कप, प्लेट, चम्मच, स्ट्रॉ, छोटे पैकेट और डिस्पोजेबल सामान शामिल हैं। यह प्लास्टिक आसानी से नष्ट नहीं होती और वर्षों तक जमीन व पानी में पड़ी रहती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और जानवर भी इसे खाकर बीमार पड़ जाते हैं। जलाने पर इससे जहरीली गैस निकलती है जो इंसानों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार प्लास्टिक प्रदूषण से कैंसर, सांस की बीमारी और हार्मोन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

ये विकल्प अपना सकते हैं

  • कपड़े के बैग
  • जूट के बैग
  • कागज के थैले
  • कपड़े या जूट की शॉपिंग थैली
  • स्टील या तांबे की बोतल
  • कांच की बोतल और कंटेनर
  • स्टील के टिफिन और डिब्बे
  • बांस से बने चम्मच, स्ट्रॉ और प्लेट
  • मिट्टी के कुल्हड़ और बर्तन
  • लकड़ी के चम्मच और फोर्क
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