कविता.रोहतक : बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल ने रोहतक में बिजली सप्लाई व्यवस्था को झटका दे दिया है। बृहस्पतिवार से शुरू हुई हड़ताल के पहले ही दिन शहर के करीब आधे हिस्से और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति सामने आई। पुराने शहर के कई इलाकों में बिजली गुल रहने से लोगों की परेशानी बढ़ गई, जबकि सेक्टर-1 और जाट भवन के आसपास दोपहर तक सप्लाई सामान्य रही।
निजीकरण के विरोध और लंबित मांगों को लेकर मैदान में उतरे बिजली कर्मचारियों तथा सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा रहने से संकट और गहराने के आसार हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले तीन दिन तक शहर की बिजली व्यवस्था कैसे संभलेगी और लोगों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
पुराने शहर में बिजली का झटका, कई इलाकों में सप्लाई प्रभावित
हड़ताल का असर रोहतक के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने लगा है। पुराने शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही, जबकि सेक्टर-1 और जाट भवन के आसपास दोपहर तक लोगों को राहत मिली। सप्लाई बाधित होने से घरों, दुकानों और दूसरे कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, शहर के किन-किन क्षेत्रों में कितनी देर तक बिजली बंद रही और कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए, इसका विस्तृत आंकड़ा सामने आना बाकी है। ऐसे में लोगों की नजर बिजली निगम की व्यवस्था पर टिकी है।
निजीकरण के विरोध में कर्मचारी, तीन दिन तक जारी रहेगा विरोध
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के पीछे निजीकरण का विरोध प्रमुख मुद्दा है। कर्मचारी बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की आशंकाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बिजली जैसी जरूरी सेवा में निजीकरण से कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उपभोक्ताओं के हितों पर असर पड़ सकता है। हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति और जरूरी सेवाओं को बनाए रखना निगम के लिए बड़ी चुनौती होगी। तीन दिन के इस आंदोलन का असर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक किस स्तर पर पड़ता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।
सीएम के साथ बैठक भी नहीं निकाल सकी समाधान
हड़ताल से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ कर्मचारियों की बैठक हुई, लेकिन बातचीत से सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। बातचीत विफल रहने से फिलहाल हड़ताल खत्म होने के संकेत नहीं मिले हैं। कर्मचारियों की मांगों और सरकार के रुख के बीच सहमति बनने पर ही गतिरोध टूटने की उम्मीद है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच दोबारा बातचीत होती है या नहीं।
कर्मचारियों की मांगों पर टिका समाधान, उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता
निजीकरण का विरोध करने के साथ बिजली कर्मचारी आम तौर पर पुरानी पेंशन योजना, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, खाली पद भरने, समान काम के लिए समान वेतन, कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और लंबित मांगों के समाधान जैसे मुद्दे भी उठाते रहे हैं। हालांकि, रोहतक में जारी मौजूदा हड़ताल के लिए कर्मचारी संगठनों की सभी आधिकारिक मांगों की पुष्टि होना जरूरी है। दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं की चिंता बिजली सप्लाई को लेकर है। यदि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द व्यवस्था बहाल नहीं हुई, तो घरेलू कामकाज, व्यापार और अन्य जरूरी सेवाओं पर परेशानी बढ़ सकती है।

