Wednesday, July 15, 2026
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रोहतक में नशे का जाल! इंजेक्शन से हेरोइन तक, युवाओं को निगल रहा जहर

  • 45 संपत्तियां अटैच, फिर भी नहीं टूटा नशे का नेटवर्क
  • बढ़ता कारोबार, गिरफ्त में युवा और समाज के सामने बड़ी चुनौती

कविता.रोहतक : शिक्षा और खेलों के लिए पहचान रखने वाला रोहतक इन दिनों नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर गंभीर चिंता के केंद्र में है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कुछ युवक खुलेआम नशे के इंजेक्शन लगाते दिखाई दिए। इस वीडियो ने न केवल प्रशासन बल्कि आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी।

शहर के विभिन्न इलाकों में समय-समय पर पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जाती रही है। साहंसी मोहल्ला भी उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां समय-समय पर छापेमारी की खबरें सामने आती रही हैं। अब तक 45 संपत्तियां अटैच किए जाने की कार्रवाई इस बात की ओर संकेत करती है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ लगातार कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन कार्रवाइयों के बावजूद नशे के नेटवर्क और इसकी पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

45 संपत्तियां अटैच, फिर भी खत्म नहीं हो रहा नेटवर्क

नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई के तहत अब तक 45 संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। किसी भी जिले में इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों का अटैच होना यह दर्शाता है कि अवैध नशे का कारोबार केवल छोटे स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं। कानून का शिकंजा लगातार कस रहा है, लेकिन यह भी जरूरी है कि सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ने और नए नेटवर्क बनने से रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई जारी रहे।

युवाओं को बना रहा सबसे बड़ा शिकार

रोहतक में सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि नशे की गिरफ्त में बड़ी संख्या में युवा आ रहे हैं। आसान कमाई की चाह, गलत संगत, मानसिक तनाव, बेरोजगारी, जिज्ञासा और सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे कई कारण युवाओं को नशे की ओर धकेल सकते हैं। शुरुआत अक्सर शौक या दोस्तों के दबाव में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत गंभीर लत में बदल जाती है। एक बार लत लगने के बाद व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक जीवन तेजी से प्रभावित होने लगता है।

कई तरह के नशीले पदार्थों की चुनौती

रोहतक में अफीम, चरस, चूरा पोस्त, हेरोइन और गांजा जैसे विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग प्रकार के नशे शरीर और दिमाग पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं, लेकिन इन सभी का अंतिम परिणाम व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर गंभीर नकारात्मक असर के रूप में सामने आता है। नशे की उपलब्धता जितनी आसान होती है, उसके दुष्परिणाम उतनी ही तेजी से समाज में फैलते हैं।

नशे के नुकसान केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं

नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं होता, बल्कि पूरा परिवार इसकी कीमत चुकाता है। नशे का आदी व्यक्ति धीरे-धीरे पढ़ाई और रोजगार से दूर होने लगता है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, रिश्तों में तनाव बढ़ता है और कई मामलों में अपराध की घटनाएं भी सामने आती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नशे की लत से हृदय, फेफड़े, लीवर और मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ सकता है। इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वालों में संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मानसिक अवसाद, चिंता, चिड़चिड़ापन और आत्मघाती विचार जैसी समस्याएं भी नशे की लत से जुड़ी हो सकती हैं।

ऐसे बच सकते हैं युवा

नशे से बचाव की शुरुआत परिवार और समाज से होती है। अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और उनसे खुलकर संवाद बनाए रखना चाहिए। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाओं को नियमित रूप से जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि युवा नशे के दुष्परिणामों को समझ सकें। खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और कौशल विकास कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने से भी उन्हें सकारात्मक दिशा मिल सकती है। यदि किसी व्यक्ति में नशे की लत के संकेत दिखाई दें तो समय रहते चिकित्सकीय परामर्श और नशामुक्ति केंद्र की सहायता लेना महत्वपूर्ण होता है।

समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी

नशे के खिलाफ केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो सकती। इसके लिए समाज, परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। लोगों को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचानी चाहिए। वहीं युवाओं को यह समझाने की जरूरत है कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि नई समस्याओं की शुरुआत है। यदि समाज जागरूक रहेगा और कानून का प्रभावी पालन होगा तो नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में सफलता मिल सकती है।

बढ़ती चुनौती पर गंभीर मंथन की जरूरत

रोहतक में नशे से जुड़ी घटनाएं और लगातार हो रही कार्रवाई यह स्पष्ट करती हैं कि यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई, प्रभावी जनजागरूकता, बेहतर पुनर्वास व्यवस्था और परिवारों की सक्रिय भूमिका ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है। यदि समय रहते इस दिशा में व्यापक और समन्वित प्रयास नहीं किए गए, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किए जा सकते हैं।

पुलिस टीम चला रही अभियान, नशा मुक्त भारत–सुरक्षित भारत का संकल्प

नशा मुक्ति टीम ने ग्रामीणों और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए “Say Yes to Life, No to Drugs” अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। टीम ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए OTP, पासवर्ड और निजी जानकारी साझा न करने की सलाह दी। साइबर ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट व सीट बेल्ट का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।

उप निरीक्षक मोहन ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना डायल 112 और नशा संबंधी जानकारी MANAS हेल्पलाइन 1933 पर देने की अपील की।

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