Thursday, April 25, 2024
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दिल्ली-हरियाणा सीमा पर टिकरी बॉर्डर पिछले13 दिनों से सील, लोग उठा रहे नुकसान

बहादुरगढ़। दिल्ली-हरियाणा सीमा किसान आंदोलन के कारण सील की हुई हैं। आज 13वां दिन है जब सीमाओं को बड़े बड़े बैरिकेट से बंद कर दिया गया है। दिल्ली कूच की जिद पर अड़े किसानों को हरियाणा पुलिस ने पंजाब की सीमाओं पर रोक रखा है। वहीं दिल्ली की सीमाओं पर भी इसे लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बहादुरगढ़ में दिल्ली, हरियाणा टिकरी और झाड़ोदा बॉर्डर के जरिए आपस में जुड़ते हैं। इन दोनों सीमाओं को 11 फरवरी से ट्रैफिक के लिए बंद किया गया था। जिस कारण बीते 13 दिनों से नागरिक दिल्ली आने-जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके साथ ही दुकानदार और उद्योगों को भी भारी नुक्सान का सामना करना पड़ रहा है।

हरियाणा पुलिस का लगातार बढ़ता जा रहा घेरा

टिकरी बॉर्डर से पहले बहादुरगढ़ के सेक्टर-9 मोड़ पर हरियाणा पुलिस का सुरक्षा घेरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस की इन तैयारियों को देखते हुए लगता है कि अगर किसानों के साथ सरकार का समझौता नहीं होता और किसान दिल्ली की तरफ कूच करते हैं तो किसानों को दिल्ली में किसी भी सूरत में घुसने नहीं दिया जाएगा। फिलहाल टिकरी बॉर्डर पर माहौल शांत है। हालांकि लोग पुलिस की सुरक्षा दीवारों के कारण बंद रास्तों से बेहद परेशान हैं। यहां एक लंबी चौड़ी सीमेंट कंक्रीट की दीवार बनाने के बाद पुलिस ने सीमेंट व लोहे के बैरिकेड्स पर कटीली तारें लगा रखी हैं। केंद्र सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच एमएसपी गारंटी कानून को लेकर पांचवें दौर की वार्ता विफल होने के बाद 21 फरवरी को खनौरी और शंभू बॉर्डर पर हुए तनाव के बाद टिकरी बॉर्डर पर भी जबरदस्त तैनाती और सख्ती दिखी।

हरियाणा-पंजाब सीमा पर शांति के चलते दिल्ली सीमा पर शांति

किसानों द्वारा 2 दिन के लिए दिल्ली कूच रोकने के बाद सीमाओं पर शांति दिख रही है। हरियाणा और पंजाब बॉर्डर पर शांति के चलते दिल्ली-हरियाणा सीमा भी शांत रही। दिल्ली और हरियाणा पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। किसानों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए टिकरी व झाड़ोदा बॉर्डरों पर बैरिकेड्स, कंटीले तारों और कंक्रीट ब्लॉकों की कई लेयर लगाई हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल शांति का माहौल है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। आमजन से भी किसान आंदोलन के दृष्टिगत झज्जर पुलिस द्वारा जारी की गई रूट एडवाइजरी का अनुसरण करने की अपील की।

400 करोड़ का नुकसान

सडक़ मार्ग से जाने वाले सामान पर किसान आंदोलन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। ना तो यहां ठीक से माल आ पा रहा है और ना ही जा पा रही है। पंजाब, हिमाचल से माल ढुलाई में अब ट्रांसपोर्टर भाड़ा बढ़ाने की बात कर रहे हैं। क्योंकि आंदोलन में हाईवे जाम होने के कारण गाडिय़ों को 100 किलोमीटर से भी अधिक अतिरिक्त घूमकर आना-जाना पड़ रहा है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी कहते हैं कि इस अतिरिक्त चक्कर के कारण ट्रांसपोर्टर माल भाड़ा बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

ऐसा करना उनकी भी मजबूरी है। समस्याएं बहुत आ रही हैं। महंगा भाड़ा देकर भी माल इतनी आसानी से नहीं पहुंच रहा। हर समय ट्रांसपोर्टर को डर रहता है कि कहीं आंदोलन की भेंट उनके वाहन आ गए तो नुकसान ज्यादा होगा। दीपक मैनी ने कहा कि सरकार को हाईवे जाम करने को लेकर कठोर नियम, कानून बनाने चाहिए, ताकि कोई भी हाईवे जाम करके देश की अर्थव्यवस्था को बाधित ना कर सके। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी भी है। इस पर एक्शन किया जाना चाहिए। अगर किसी को आंदोलन, प्रदर्शन करना है तो वह एक तरफ बैठकर करे।

टोल, डीजल का बढ़ रहा है खर्चा

किसान आंदोलन के चलते नुकसान के सवाल पर ट्रांसपोर्टर एचएस शर्मा का कहना है कि बहुत अधिक नुकसान पिछले दिनों से ट्रांसपोर्टर झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल की तरफ करीब 500 ट्रक रोजाना जाते हैं। इन सभी गाडिय़ों का रूट डायवर्ट किया गया है। उदाहरण देकर उन्होंने कहा कि उनकी पांच गाडिय़ां रोजाना इन रूटों पर जाती हैं। इन गाडिय़ों को दूसरे रूटों पर ले जाने के कारण ढाई से तीन लाख रुपये का टोल व डीजल एक्सट्रा लग रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होता, सरकार को कुछ रूटों पर कॉमर्शियल वाहनों के लिए टोल फ्री कर देने चाहिए। क्योंकि गाडिय़ों में डीजल भी अधिक लगता है। डीजल तो नहीं बचा सकते, लेकिन सरकार टोल फ्री कर दे तो ट्रांसपोर्टर को कुछ राहत मिल सकती है।

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