गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक
मानसून आने से पहले ही रोहतक शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। सेक्टर-1 और आसपास के इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि हल्की बारिश भी लोगों के लिए परेशानी बन जाती है। हरियाणा में इस साल मानसून जून के अंतिम सप्ताह 25 जून से 30 जून तक पहुंचने की संभावना है। मई के अंत तक या जून के पहले सप्ताह तक केरल पहुंचने की संभावना है। समय कम है, इसलिए अभी से तैयारी करनी होगी, नहीं रोहतक का हाल खराब होने वाला है। छोटूराम चौक के पास मस्तनाथ स्कूल के नजदीक बना नाला इसकी सबसे बड़ी तस्वीर पेश करता है, जहां तीन फीट गहरे नाले में दो फीट तक मिट्टी जमा हो चुकी है। ऊपर से देखने पर नाला सामान्य लगता है, लेकिन अंदर जमी गाद पानी के बहाव को रोक रही है, जिससे बारिश के समय जलभराव तय माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो सफाई की गति तेज हुई और न ही कोई स्थायी समाधान निकल पाया। अब मानसून करीब होने के चलते लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
अधूरी योजना
सेक्टर-1 में जल निकासी सुधारने के लिए नगर निगम ने पिछले साल स्टॉर्म वाटर लाइन बिछाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। लेकिन यह प्रोजेक्ट अधूरा है। नतीजा यह है कि जिन इलाकों को राहत मिलनी थी, वहां स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।
डिस्पोजल सिस्टम पर बढ़ता दबाव
शहर में जल निकासी के लिए डिस्पोजल प्वाइंट बनाए गए हैं। इन तक पानी पहुंचाने के लिए छोटे-बड़े नालों का नेटवर्क है, लेकिन जब यही नाले जाम हो जाते हैं तो पूरा सिस्टम प्रभावित हो जाता है। नगर निगम के तहत कर्मचारी इनकी देखरेख में लगे हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर हालात सुधारते नजर नहीं आ रहे।
सफाई नहीं तो समाधान नहीं
रामगोपाल कॉलोनी के राजेश, सोनम, कविता, सेक्टर की रहने वाली सुनिता, संतोष आदि ने बताया कि जब तक नालों का दोबारा निर्माण और नियमित सफाई नहीं होगी, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उनका कहना है कि मानसून आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में तुरंत सफाई कार्य शुरू किया जाना चाहिए।
प्रशासन ने दिए तैयारी के निर्देश
हालांकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। बैठक में मानसून से पहले नालों की सफाई और जरूरी इंतजाम पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब भी सवाल बरकरार
हर साल मानसून से पहले दावे और बैठकें होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। अधूरे प्रोजेक्ट, जाम नाले और बढ़ता सीवर दबाव, ये सब मिलकर रोहतक को हर बारिश में जलभराव की समस्या से जूझने पर मजबूर कर देते हैं। अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन के दावे हकीकत में बदलते हैं या फिर शहर एक बार फिर पानी-पानी होता है।

