अपनी आस्था से गहराई से जुड़ जाता है मरीज
शोध दल में महारानी लक्ष्मी बाई (एमएलबी) मेडिकल कालेज, झांसी के एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अंशुल जैन के अलावा डॉ. बृजेन्द्र वर्मा, डॉ. पंकज सौनकिया, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. पुष्पेन्द्र अग्रवाल (जालौन), डॉ. पारस गुप्ता (जालौन) और डॉ. चारु ठाकुर शामिल थे। उन्होंने बताया कि जब कोई मरीज तकलीफ में होता है तो वह अपनी आस्था से गहराई से जुड़ जाता है। ऐसे समय में आध्यात्मिकता, विशेष रूप से हिंदू धर्म में प्रयुक्त संगीत प्रभावी चिकित्सा हस्तक्षेप बन सकता है।
क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री आफ इंडिया में भी है पंजीकृत
एमएलबी के सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. पंकज सौनकिया ने बताया कि यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध मानकों के अनुसार किया गया है, जिसमें संगीत को औपचारिक चिकित्सा इंटरवेंशन के रूप में उपयोग किया गया है। यह ट्रायल क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री आफ इंडिया में भी पंजीकृत है।
वैज्ञानिकता को मिली आध्यात्मिकता से पुष्टि
डॉ. अंशुल ने बताया कि लोग अक्सर आध्यात्मिकता को गैर-विज्ञान मानते हैं, लेकिन यह शोध प्रमाणित करता है कि मंत्र, भजन और आरती जैसे आध्यात्मिक माध्यम चिकित्सकीय दृष्टिकोण से भी लाभकारी हैं। यह विज्ञान और आध्यात्म का संगम है। यह अध्ययन इस बात की ओर इशारा करता है कि आध्यात्मिकता को आधुनिक चिकित्सा में शामिल करना न केवल संभव है, बल्कि यह सुरक्षित, प्रभावी और व्यावहारिक उपाय भी बन सकता है। यह शोध भविष्य में संगीत चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य और सर्जिकल सेटिंग्स में नए आयाम खोलने की प्रेरणा दे सकता है।
सुनाए गए प्रमुख भक्ति गीत
- ॐ गण गणपतये नमः
- त्वमेव माता च पिता त्वमेव
- गायत्री मंत्र
- रघुपति राघव राजा राम
- महामृत्युंजय मंत्र
- ॐ जय जगदीश हरे
- हनुमान चालीसा (धीमी गति में)
- श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन
- अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं
- हरे राम हरे कृष्ण मंत्र