कविता.रोहतक : अफीम, गांजा, नशे की गोलियां और हेरोइन… ये ऐसे नशे हैं, जिनकी गिरफ्त में आने के बाद जिंदगी का रास्ता बेहद मुश्किल हो सकता है।
रोहतक में पिछले 15 दिनों के दौरान नशे की दो बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद एक बार फिर यह सवाल गंभीर हो गया है कि जिले में सूखे नशे की सप्लाई का नेटवर्क कितना गहरा हो चुका है। पुलिस की कार्रवाई में सामने आए मामलों की कड़ियां ओडिशा और नेपाल तक जुड़ती दिखाई दे रही हैं।
डेढ़ करोड़ का गांजा और अब अफीम-गोलियां
पिछले दिनों सांपला क्षेत्र में पुलिस ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत का गांजा बरामद किया था। जांच में सामने आया कि गांजे की यह खेप ओडिशा से लाई गई थी। इस कार्रवाई के कुछ ही समय बाद अब अफीम और नशे की गोलियों की खेप पकड़ी गई है, जिसके नेपाल से लाए जाने की बात सामने आई है। लगातार सामने आ रही इन कार्रवाइयों ने स्थानीय स्तर पर नशे की उपलब्धता और इसकी सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सीमा पार से आती खेप, स्थानीय युवाओं के हाथ में नेटवर्क
इन मामलों की सबसे चिंताजनक कड़ी यह है कि दूर-दराज के राज्यों और पड़ोसी देश से आने वाला नशा रोहतक और आसपास के इलाकों तक पहुंच रहा है। पुलिस कार्रवाई में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आ रही है, उनमें रोहतक और सोनीपत क्षेत्र के युवा भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क स्थानीय युवाओं को अपनी कड़ी के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
तस्कर बनने के साथ नशे की गिरफ्त का खतरा
नशे की तस्करी का असर केवल बरामद होने वाली खेप या गिरफ्तार किए जाने वाले आरोपियों तक सीमित नहीं है। यदि युवा इस धंधे में पैसा कमाने के लिए शामिल होते हैं, तो उनके खुद नशे की गिरफ्त में आने का खतरा भी बढ़ जाता है। एक तरफ तस्करी का अपराध और दूसरी तरफ नशे की आदत, दोनों मिलकर युवा पीढ़ी और उनके परिवारों के सामने गंभीर सामाजिक संकट खड़ा कर सकते हैं।
पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई किए जाने के बावजूद बड़ा सवाल यह है कि आखिर नशे की ये खेप रोहतक तक पहुंच कैसे रही हैं और इनके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है। ओडिशा से गांजा और नेपाल से अफीम व नशे की गोलियां पहुंचने के मामले यह संकेत देते हैं कि सप्लाई का दायरा स्थानीय सीमा से कहीं बड़ा हो सकता है। हर बरामद खेप के साथ यह जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि इसके पीछे कितने लोग और कितनी कड़ियां जुड़ी हैं।
युवाओं को बचाना सबसे बड़ी चुनौती
नशे के खिलाफ कार्रवाई में केवल तस्करों की गिरफ्तारी और नशे की खेप बरामद करना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। असली चुनौती उन युवाओं तक नशा पहुंचने से रोकने की है, जो इसके ग्राहक या तस्करी के माध्यम बनने की स्थिति में आ सकते हैं। रोहतक में सामने आए हालिया मामलों ने प्रशासन, पुलिस, परिवार और समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर समय रहते इस नेटवर्क पर रोक नहीं लगी, तो इसका असर आने वाली युवा पीढ़ी पर कितना गहरा होगा।

