रोहतक: सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। कई दिनों से कूड़ा नहीं उठने के कारण लोग बदबू और गंदगी से परेशान हैं।
हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग कूड़े के ढेर में आग लगाकर उसे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह परेशानी कम करने के बजाय शहर की हवा को जहरीला बना रही है। कूड़ा जलने से निकलने वाला धुआं सांस के साथ शरीर में पहुंचकर आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कत के साथ गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
कूड़े के ढेर बने शहर की नई मुसीबत
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचने के साथ शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर बढ़ते जा रहे हैं। सड़कों, चौक-चौराहों और रिहायशी इलाकों के आसपास जमा कचरे से लोगों को बदबू और गंदगी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। लगातार जमा हो रहे कचरे के कारण मच्छर और अन्य कीट पनपने की आशंका भी बढ़ गई है।
कूड़ा नहीं उठा तो खुद ही लगा दी आग
कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लोगों के लिए इतनी बड़ी परेशानी बन गए हैं कि अब कुछ लोग उसमें आग लगाने लगे हैं। कचरा जलने से कुछ समय के लिए ढेर कम होता दिखाई देता है, लेकिन इसके साथ निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास रहने वाले लोगों के लिए नई परेशानी खड़ी कर देता है। खासकर प्लास्टिक, रबर, कपड़े और अन्य मिश्रित कचरे के जलने पर धुएं में कई हानिकारक प्रदूषक शामिल हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार खुले में कचरा जलाने से निकलने वाले धुएं का संपर्क खांसी, त्वचा में जलन और सांस संबंधी बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है।
कार्बन मोनोऑक्साइड खतरनाक
कचरा जलाने पर निकलने वाली प्रमुख हानिकारक गैसों में कार्बन मोनोऑक्साइड शामिल है। इसके अलावा जलने की स्थिति और कचरे की सामग्री के आधार पर नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड तथा अन्य जहरीले रसायन और सूक्ष्म कण भी हवा में पहुंच सकते हैं। प्लास्टिक जैसे पदार्थ जलने पर धुएं में बेहद हानिकारक रासायनिक प्रदूषक बन सकते हैं। यही वजह है कि खुले में कचरा जलाना महज बदबू और धुएं की समस्या नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण का गंभीर स्रोत है।
सांस के साथ शरीर में पहुंचता है जहरीला धुआं
कचरा जलने से निकलने वाले धुएं और सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने पर आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक प्रदूषित धुएं के संपर्क में रहने से श्वसन तंत्र पर गंभीर असर पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए प्रदूषित धुआं विशेष रूप से चिंता का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खुले में कचरा जलाने को स्वास्थ्य और वायु गुणवत्ता दोनों के लिए नुकसानदायक बताया है।
समाधान कूड़ा जलाना नहीं, व्यवस्था बहाल करना
शहर में सफाई व्यवस्था बाधित होने से पैदा हुई समस्या का समाधान कूड़े में आग लगाना नहीं है। कचरे को जलाने से एक समस्या कम होने के बजाय हवा में प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को हड़ताल का जल्द समाधान निकालने के साथ कचरा उठाने की वैकल्पिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करनी होगी। लोगों को भी कूड़े में आग लगाने से बचना चाहिए और कचरे को निर्धारित स्थान पर ही रखना चाहिए। सफाई व्यवस्था जितनी जल्दी पटरी पर लौटेगी, उतना ही शहर को गंदगी और कचरा जलाने से पैदा हो रहे दोहरे स्वास्थ्य खतरे से राहत मिलेगी।


