Saturday, September 12, 2026
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एक क्लिक रुका तो थम गई विकास की रफ्तार, डिजिटल सिस्टम बना बाधा

कविता.रोहतक

रोहतक सहित पूरे हरियाणा में विकास कार्यों की रफ्तार इन दिनों बजट की कमी या प्रशासनिक सुस्ती से नहीं, बल्कि डिजिटल व्यवस्था के ठप होने से प्रभावित हो रही है।

सरकारी इंजीनियरिंग विभागों की अधिकांश कार्यप्रणाली ऑनलाइन सिस्टम पर आधारित है। इसी सिस्टम के लंबे समय से बंद रहने के कारण नई परियोजनाओं की मंजूरी, टेंडर, वर्क ऑर्डर और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इसका असर शहर से लेकर गांवों तक दिखाई देने लगा है। जिन योजनाओं के शुरू होने का इंतजार लोग कर रहे थे, वे अब तकनीकी कारणों से फाइलों में अटकी हैं।

गांव और शहर दोनों में विकास कार्य प्रभावित

ऑनलाइन प्रक्रिया रुकने का असर केवल किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है। शहरी क्षेत्रों में सड़क, नाली, भवन और पेयजल से जुड़े प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में पंचायतों द्वारा भेजे गए विकास कार्य भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।

टेंडर से लेकर भुगतान तक पूरी चेन तक थम जाती है

बहुत से कार्यों की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होती है। एस्टीमेट तैयार होने के बाद तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर, वर्क ऑर्डर और अंत में बिल भुगतान तक हर चरण ऑनलाइन होता है। सिस्टम बंद होने से यह पूरी चेन रुक गई है, जिससे नए कार्यों की शुरुआत संभव नहीं हो पा रही।

ठेकेदारों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण कई निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होने लगी है। मजदूरी, मशीनरी और निर्माण सामग्री का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसका असर निर्माण क्षेत्र की गतिविधियों पर साफ दिखाई देने लगा है।

रोहतक में सबसे ज्यादा असर* सड़कों और पंचायत योजनाओं पर

सूत्रों के अनुसार जिले में करीब 28 सड़क परियोजनाओं के टेंडर प्रभावित हुए, वहीं पंचायत विभाग के 90 से अधिक एस्टीमेट और टेंडर पर असर पड़ा। जिन योजनाओं की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, वे भी डिजिटल अड़चन के कारण प्रभावित हुए।

हर दिन बढ़ रही लंबित संख्या

यदि डिजिटल व्यवस्था जल्द पहले की तरह नहीं हुई तो विकास कार्यों का बैकलॉग लगातार बढ़ता जाएगा। नई योजनाएं शुरू होने में और देरी होगी, जबकि पहले से स्वीकृत परियोजनाओं का कैलेंडर भी प्रभावित रहेगा।

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