Saturday, October 17, 2026
Homeहरियाणारोहतकपीजीआईएमएस निदेशक की कुर्सी पर संकट, डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति पर...

पीजीआईएमएस निदेशक की कुर्सी पर संकट, डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

  • 65 साल की उम्र पार करने के बाद तीन साल का कार्यकाल देने पर उठे सवाल

कविता.रोहतक: पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) के निदेशक पद पर दोबारा नियुक्ति का मामला एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में घिर गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को तीन साल के लिए दोबारा निदेशक नियुक्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

अदालत ने हरियाणा सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि संस्थान का प्रशासनिक कामकाज सुचारू रखने के लिए 65 वर्ष से कम उम्र के योग्य व्यक्ति को अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी जाए। इसके लिए विश्वविद्यालय के लागू नियमों और स्टैच्यूट का पालन करना होगा।

नियुक्ति पर सवाल

डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति को एक डॉक्टर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई कि डॉ. सिंघल 31 जुलाई को 65 वर्ष के हो चुके हैं, जबकि सरकार ने 13 अगस्त को उन्हें तीन साल के लिए फिर से निदेशक नियुक्त करने का आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, विश्वविद्यालय के नियमों में निदेशक के पद पर बने रहने के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित है और इससे आगे सेवा जारी रखने के लिए छूट देने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है।

हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में विश्वविद्यालय के स्टैच्यूट-3 का हवाला दिया। इसके अनुसार, निदेशक का कार्यकाल तीन साल का होता है और इसे नवीनीकृत किया जा सकता है, लेकिन 65 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद निदेशक पद पर बने रहने की अनुमति नहीं है, भले ही निर्धारित कार्यकाल अभी पूरा न हुआ हो। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि निर्धारित नियमों और प्रक्रिया से हटकर केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर नियुक्ति नहीं की जा सकती। पदभार संभाल लेने से भी नियुक्ति की पात्रता से जुड़ी कानूनी खामी दूर नहीं होती।

सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने हरियाणा के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि डॉ. सिंघल को 65 वर्ष की आयु सीमा में किस कानूनी प्रावधान के तहत छूट दी गई और इसकी मंजूरी किस सक्षम अधिकारी ने दी। इसके साथ ही नियुक्ति का आधार, सरकार की सिफारिश और नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने से संबंधित रिकॉर्ड भी अदालत में पेश करना होगा।

डॉ. मित्तल के मामले के बाद फिर चर्चा में निदेशक पद

पीजीआईएमएस के निदेशक पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर यह दूसरा मामला है, जिसमें हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। इससे पहले डॉ. कुंदन मित्तल की दोबारा नियुक्ति पर भी रोक लगाई गई थी। अब डॉ. सिंघल की नियुक्ति पर रोक के बाद संस्थान के प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। अदालत ने डॉ. सिंघल को 25 नवंबर 2026 के लिए नोटिस जारी किया है और मामले को एक अन्य लंबित याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल उनकी दोबारा नियुक्ति का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।

RELATED NEWS

Most Popular