Saturday, May 9, 2026
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जहां एंबुलेंस भी फंसे… ऐसा हो गया दिल्ली बाईपास का हाल

  • दिल्ली बाईपास पर बेतरतीब पार्किंग ने बिगाड़ी शहर की चाल
  • अस्पताल, होटल और टैक्सियों के बीच रोज जाम में फंस रहे लोग

गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक

शहर का सबसे व्यस्त दिल्ली बाईपास अब लोगों के लिए राहत का नहीं, बल्कि रोज की परेशानी का रास्ता बनता जा रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक यहां वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। हालत यह है कि पीक आवर्स में कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने में भी 15 से 20 मिनट तक लग जाते हैं।

स्पताल, यूनिवर्सिटी, सर्किट हाउस, आईटीआई और बड़े होटलों के बीच से गुजरने वाला यह मार्ग लगातार बढ़ते ट्रैफिक के दबाव से जूझ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है, जिन्हें हर दिन जाम में फंसकर समय गंवाना पड़ता है। जाम इतना है कि कई बार तो एंबुलेंस भी फंस जाती है

अस्पताल के बाहर ही सबसे ज्यादा जाम

दिल्ली बाईपास पर स्थित एक बड़े निजी अस्पताल के बाहर दिनभर वाहनों की भीड़ लगी रहती है। अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त पार्किंग नहीं होने के कारण गाड़ियां सड़क किनारे ही खड़ी कर दी जाती हैं। अस्पताल के मुख्य गेट पर एंबुलेंस, निजी कारें और ऑटो एक साथ रुकते हैं, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह धीमा पड़ जाता है। पीछे की कॉलोनी वाली सड़क पर भी वाहन खड़े रहने से वहां रहने वाले लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के बाहर अक्सर ऐसी स्थिति बन जाती है कि दो वाहन आमने-सामने आ जाएं तो निकलना मुश्किल हो जाता है।

सड़कें पार्किंग स्थल बन चुकी हैं

बाईपास पर सबसे बड़ी समस्या अवैध और बेतरतीब पार्किंग बन चुकी है। होटल, अस्पताल और आसपास के दफ्तरों में आने वाले लोग अपनी गाड़ियां सीधे सड़क किनारे खड़ी कर देते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और ट्रैफिक एक लेन तक सीमित रह जाता है। कई बार बड़ी गाड़ियों के रुकने से पीछे लंबी लाइन लग जाती है। शाम के समय तो हालात इतने खराब हो जाते हैं कि वाहन रेंगते नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि सड़कें अब ट्रैफिक मार्ग कम और अस्थायी पार्किंग ज्यादा दिखाई देती हैं।

टैक्सियों का अड्डा बना बाईपास का मोड़

दिल्ली जाने वाली टैक्सियां भी जाम बढ़ाने में बड़ी वजह बन रही हैं। बाईपास के मोड़ पर कई टैक्सी चालक घंटों सवारियों का इंतजार करते रहते हैं। सड़क किनारे खड़ी इन गाड़ियों के कारण दूसरे वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है। कई बार अचानक टैक्सी रोककर सवारी बैठाने या उतारने से पीछे ट्रैफिक रुक जाता है।

मरीजों और छात्रों की बढ़ रही मुश्किल

दिल्ली बाईपास से रोज हजारों लोग गुजरते हैं। कोई इलाज के लिए अस्पताल पहुंचता है तो कोई यूनिवर्सिटी और आईटीआई में पढ़ाई या काम के लिए आता है। इसके अलावा सर्किट हाउस और आसपास के सरकारी दफ्तरों में भी दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। शादी और कार्यक्रमों के दौरान होटलों में भीड़ बढ़ने से ट्रैफिक और ज्यादा दबाव में आ जाता है। कई मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत होती है, जबकि छात्र और कर्मचारी रोज लेट होने की समस्या झेल रहे हैं।

लोग बोले- अब प्रशासन को जागना होगा

रोज जाम में फंसने वाले लोगों का कहना है कि अब स्थिति असहनीय होती जा रही है। कई वाहन चालक इस रास्ते से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन शहर के प्रमुख संस्थान इसी मार्ग पर होने के कारण विकल्प भी कम हैं। दिल्ली बाईपास पर दुकान चलाने वाले नरेंद्र, दिनेश, आयुष आदि बहुत से दुकानदारों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। सभी ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क किनारे पार्किंग पर सख्ती हो, टैक्सियों के लिए अलग स्थान तय किया जाए और अस्पतालों व होटलों को अपनी पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।

ऐसे मिल सकती है राहत

ट्रैफिक विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि दिल्ली बाईपास पर पार्किंग की सही व्यवस्था हो जाए तो काफी हद तक जाम कम हो सकता है। अस्पतालों और होटलों को अपने परिसर में पर्याप्त पार्किंग बनानी चाहिए। वहीं टैक्सियों और ऑटो के लिए अलग स्टैंड तय किए जाएं ताकि वे मुख्य सड़क पर खड़े न हों। सर्किट हाउस और आईटीआई रोड के आसपास पार्किंग जोन विकसित किए जाने से भी ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सकता है। फिलहाल लोग इसी उम्मीद में हैं कि प्रशासन जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा।

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