- एक पुर्जे ने डुबो दिए 7 करोड़: तिलियार पर लेजर शो अब नहीं चलता
- 2013 में कांग्रेस सरकार ने मंजूरी किया, 2018 में भाजपा ने बनवाया, नहीं हुई देखरेख
गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक : तिलियार झील पर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया साउंड एंड लाइट मल्टीमीडिया लेजर शो आज सरकारी लापरवाही की मिसाल बन चुका है। जिस प्रोजेक्ट को पर्यटन की पहचान बनना था, वह एक छोटे से पुर्जे की कमी के कारण लंबे समय से बंद पड़ा है। नतीजा करीब 7 करोड़ रुपए पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इस प्रोजेक्ट को 2013 में कांग्रेस सरकार ने मंजूरी दी थी, जबकि 2018 में भाजपा सरकार के दौरान इसे तैयार कर चालू किया गया। बड़े-बड़े दावे किए गए कि यह शो सिंगापुर के सेंटोसा लेजर शो की तर्ज पर होगा और हरियाणा के पर्यटन को नई पहचान देगा। शुरुआत में कुछ समय तक शो चला भी, लेकिन बीच बीच में खराबी भी आई। कोरोना भी आया, इसे बंद करना पड़ा।
हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपए की इस हाईटेक परियोजना को एक छोटे से तकनीकी पुर्जे की वजह से बंद होना पड़ा। वह पुर्जा आज तक नहीं मिल पाया और न ही उसे बदलने की ठोस कोशिश नजर आई। 2020 में कोरोना के दौरान इसे पूरी बंद करना पड़ा, 2021 में दोबारा शुरू किया। लेकिन कुछ साल बाद तकनीकी खामी सामने आई और शो अब हमेशा के लिए अंधेरे में चला गया। बता दें कि यह प्रदेश का पहला लेजर लाइट शो विद म्यूजिकल फाउंटेन था।
रौनक फीकी पड़ी
तिलियार झील पर्यटकों के लिए वीकेंड का बड़ा केंद्र है, वहां आने वाले लोगों को अब निराशा ही हाथ लगती है। 132 एकड़ में फैले इस पर्यटन स्थल पर हर शुक्रवार से रविवार तक बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन बंद पड़े फाउंटेन और लेजर शो के कारण यहां की रौनक फीकी पड़ चुकी है। स्थिति और गंभीर इसलिए भी है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर प्रक्रिया तक आगे नहीं बढ़ पाई है। फाइलें दफ्तरों में अटकी हैं और अधिकारी तकनीकी कारणों का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी
मामला इस साल भी संसद में उठाया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ। सवाल सीधा है कि जब 7 करोड़ खर्च किए गए, तो रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी? और अगर एक पुर्जा ही नहीं मिल पा रहा, तो क्या यह सिस्टम की नाकामी नहीं है? तिलियार झील का यह लेजर शो अब सिर्फ एक बंद प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की पोल खोलने वाला उदाहरण बन चुका है, जहां राजनीतिक श्रेय तो लिया गया, लेकिन जिम्मेदारी निभाने में सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ।
महाभारत से 1857 की क्रांति तक दिखते थे
तिलियार झील पर शुरू किया गया यह शो सिर्फ एक फाउंटेन नहीं, बल्कि मल्टीमीडिया अनुभव था। लेजर और पानी के जरिए महाभारत काल से लेकर 1857 की क्रांति तक के दृश्य दिखाए जाते थे। इसके अलावा भी कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रस्तुतियां इसमें शामिल थीं। दर्शकों से मामूली शुल्क लेकर हर शाम 7 बजे यह शो दिखाया जाता था, जो पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ था।
टेंडर अटका, जिम्मेदारी भी अधर में
इस प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव के लिए समय-समय पर टेंडर के जरिए एजेंसी तय की जाती है। लेकिन अब नया टेंडर ही जारी नहीं हो पाया रहा। अधिकारियों के मुताबिक फाइलें तकनीकी कारणों से दफ्तरों में अटकी हैं, जिससे साफ है कि समस्या सिर्फ मशीनों में नहीं, बल्कि सिस्टम में भी है।
पर्यटन पर असर, खाली हाथ लौट रहे लोग
तिलियार झील 132 एकड़ में फैला बड़ा पर्यटन स्थल है, जहां हर वीकेंड दिल्ली और एनसीआर से भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन लेजर शो और फाउंटेन बंद होने से यहां आने वाले पर्यटक निराश हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह शो चालू होता, तो यहां पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिल सकता था, लेकिन फिलहाल हालात इसके उलट हैं।

