Monday, April 20, 2026
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रोहतक का सबसे गरम मुद्दा! कब तक कटती रहेगी एमडीयू की जमीन, अब कोर्ट कॉम्प्लेक्स बना नया संग्राम

  • हेल्थ यूनिवर्सिटी को दी गई, आईजी ऑफिस, उसके पीछे नाला, नेकीराम कॉलेज, दिल्ली बाईपास से कन्हेली रोड, शहीद स्मारक, स्वतंत्रता सेनानी स्मारक, केंद्रीय विद्यालय, ओमेक्स वाला पुल सभी एमडीयू की जमीन पर ही बने

गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक :  इस वक्त हरियाणा के रोहतक का सबसे गरम मुद्दा है, एमडीयू में शिफ्ट होने वाला कोर्ट कॉम्लेक्स। शिक्षा जगत का बड़ा नाम महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) एक बार फिर जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में है। करीब 50 साल पुराने इस विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर लंबे समय से उठते सवाल अब एक बार फिर गरमा गए हैं।

आखिर एमडीयू की जमीन कब तक कटती रहेगी। एमडीयू से जमीन लेकर हेल्थ यूनिवर्सिटी को दी गई, आईजी ऑफिस, उसके पीछे नाला, नेकीराम कॉलेज, दिल्ली बाईपास से कन्हेली रोड, शहीद स्मारक, स्वतंत्रता सेनानी स्मारक, केंद्रीय विद्यालय, ओमेक्स वाला पुल सभी एमडीयू की जीमन पर ही बने हैं।

एमडीयू की स्थापना 1976 में हुई थी और यह विश्वविद्यालय करीब 662-665 एकड़ जमीन में फैला है। लेकिन समय के साथ इसकी जमीन का बड़ा हिस्सा अलग-अलग सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए लिया जाता रहा। इनमें से कई मामलों में विश्वविद्यालय को पूरा मुआवजा भी नहीं मिला।

अब नया विवाद एमडीयू की 22 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स। सरकार की इस योजना को लेकर जहां प्रशासन लगभग तैयार दिख रहा है, वहीं छात्र, कर्मचारी और वकील खुलकर विरोध में उतर आए हैं। हालात ऐसे बन रहे हैं कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन बन सकता है। हम यहां विवाद की तो बात कर ही रहे हैं, लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर कब तक एमडीयू की जमीन ऐसे ही ली जाती रहेगी।

ये सभी एमडीयू की जमीन लेकर ही बनाए

  • हेल्थ यूनिवर्सिटी के लिए जमीन दी
  • दिल्ली बाईपास के पास आईजी ऑफिस
  • 1995 की बाढ़ का पानी निकालने के लिए अस्थायी नाला
  •  केंद्रीय विद्यालय, सड़कें और ओमेक्स वाला पुल
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज खत्म करके नेकीराम कॉलेज बनाया, पॉवर हाउस के पास वाली दुकानें आज भी एमडीयू के पास ही हैं।
  •  शहीद स्मारक, स्वतंत्रता सेनानी स्मारक इसकी देखरेख की जिम्मेदारी प्रशासन की है।

इसलिए शिफ्ट किया जा रहा कोर्ट कॉम्लेक्स

सरकार रोहतक शहर के बीच स्थित कोर्ट कॉम्लेक्स को इसिलए शिफ्ट करना चाहती है, ताकि आने वाले समय में जाम की समस्या से निजात मिल सके। तैयारी पूरी कर ली गई है। नक्शा भी तैयार है, लेकिन छात्र, कर्मचारी और वकील विरोध में उतर आए हैं। छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि अब यूनिवर्सिटी एक इंच जमीन नहीं लेने देंगे, चाहे कितना बड़ा आंदोलन करना पड़े। डीसी को दिए गए ज्ञापन में अधिवक्ताओं , कर्मचारियों और अन्य संगठनों ने मांग की है कि कोर्ट परिसर को मौजूदा जगह पर ही रखा जाए।

विरोध के कारण

विश्वविद्यालय की जमीन पर बाहरी निर्माण के विरोध में कर्मचारी और छात्र उतर आए हैं। वकील भी वरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि भविष्य में एमडीयू को और भवन बनाने पड़े तो क्या होगा। कर्मचारी संघ और छात्र संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यह फैसला किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। वकीलों और विशेषज्ञों ने इस योजना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि दिल्ली बाईपास और आसपास का इलाका पहले से जाम झेल रहा है। कोर्ट और डीसी ऑफिस के पास स्वाभाविक रूप से भीड़ रहती है। नए कॉम्प्लेक्स से हालात बेकाबू हो सकते हैं। यानी यह विवाद सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि शहर की ट्रैफिक प्लानिंग से भी जुड़ गया है।

तीनों से जुड़ा मामला

एमडीयू की जमीन कोर्ट कॉम्पलेक्स शिफ्ट करने का मामला, छात्रों, वकीलों और कर्मचारियों तीनों से जुड़ गया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो रोहतक में बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है। अब सरकार के सामने चुनौति है कि परियोजना आगे बढ़ाए या छात्रों, विश्वविद्यालय, कर्मचारियों और वकीलों को प्राथमिकता दे। एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि प्रशासन कचहरी के पास स्थित एमडीयू की जमीन पर कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रहा है, जिससे कर्मचारी वर्ग विशेष रूप से प्रभावित होगा। डीसी को दिए गए ज्ञापन में एम्प्लॉइज एंड अवेयरनेस फोरम के एकडवोकेट दीपक भारद्वाज के साथ-साथ अन्य अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर को शिफ्ट नहीं करने की मांग की है।

एक इंच जमीन नहीं देंगे, चाहे कितना भी बड़ा आंदोलन करना पड़े : डॉ. प्रदीप देशवाल

एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया को इंडियन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप देशवाल ने ज्ञापन सौंपा और इस पूरे मामले को किसानों और शिक्षा के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह जमीन किसानों ने शिक्षा के लिए दान दी थी। अगर इसे छीन लिया गया तो विश्वविद्यालय का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन बिना सूचना के कैंपस की दीवार तोड़कर कब्जे की कोशिश कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एमडीयू में एक गोशाला भी बनाई गई थी, पूरा मामला जमीन कब्जाने का था, जिसका हमने विरोध किया और उसे रुकवाया। पहले भी कई एकड़ जमीन जमीन सरकार ने अलग अलग प्रोजेक्ट के लिए एमडीयू से ली, लेकिन आज तक न तो उसके बदले जतीन दी गइ और न ही पेमेंट दी। सरकार को मुफ्त की जमीन चाहिए। हम ऐसा नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए कितना भी बड़ा आंदोलन करना पड़े।

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