- फाइनेंस कमेटी आज तय करेगी आय-व्यय का रोडमैप, शहर की प्राथमिकताएं होंगी तय*
- बैठक सिर्फ बजट की नहीं, रोहतक के भविष्य की है
कविता.रोहतक : नगर निगम की फाइनेंस कमेटी की सोमवार को होने वाली बैठक सिर्फ आय-व्यय का हिसाब-किताब नहीं है, बल्कि यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में रोहतक किस दिशा में आगे बढ़ेगा। शहर में विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, पार्कों के रखरखाव, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, पार्किंग, सार्वजनिक शौचालय और अन्य नागरिक सुविधाओं पर कितना पैसा खर्च होगा और निगम अपनी आय बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाएगा। ऐसे समय में जब निगम के सामने संसाधन सीमित और अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं, यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खर्च वहीं हो, जहां जनता को सबसे ज्यादा जरूरत
नगर निगम का पहला उद्देश्य ऐसी योजनाओं पर धन खर्च करना होना चाहिए, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिले। शहर की टूटी सड़कें, जलभराव, गंदगी, खराब स्ट्रीट लाइट और सीवरेज जैसी समस्याएं लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही हैं। यदि बजट का बड़ा हिस्सा इन्हीं मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होता है तो लोगों का निगम पर विश्वास भी मजबूत होगा। दिखावटी परियोजनाओं की बजाय रोजमर्रा की जरूरतों को प्राथमिकता देना समय की मांग है।
आय बढ़ेगी तो विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी
नगर निगम केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहकर शहर का विकास नहीं कर सकता। संपत्ति कर की बेहतर वसूली, पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करना, निगम की व्यावसायिक संपत्तियों का बेहतर उपयोग, विज्ञापन से आय और किराये की समय पर वसूली जैसे कदम निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। जितनी मजबूत आय होगी, उतनी तेजी से विकास कार्य भी पूरे हो सकेंगे।
पारदर्शिता से ही बनेगा भरोसा
टेंडरों पर सवाल न उठे इसलिए फाइनेंस कमेटी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर टेंडर पूरी पारदर्शिता के साथ हो और जनता के पैसे का सही उपयोग हो। यदि सभी फैसलों, खर्चों और परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक की जाए तो विवाद भी कम होंगे और जवाबदेही भी बढ़ेगी। पारदर्शिता ही सुशासन की सबसे मजबूत पहचान है।
विकास का रोडमैप आज से तय होगा
फाइनेंस कमेटी के फैसलों का असर केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। इसी बैठक में तय प्राथमिकताएं आने वाले महीनों में सड़कों, पार्कों, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग और अन्य विकास कार्यों की दिशा तय करेंगी। इसलिए प्रत्येक निर्णय दूरगामी सोच के साथ लिया जाना जरूरी है।
पार्किंग और निगम संपत्तियां बनें कमाई का जरिया
शहर में पार्किंग व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाकर निगम अपनी आय बढ़ा सकता है। इसके अलावा मार्केट, दुकानों, सामुदायिक भवनों और अन्य निगम संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन भी राजस्व बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकता है। खाली पड़ी संपत्तियों का उपयोग शहर और निगम, दोनों के हित में होना चाहिए।
खर्च पर नियंत्रण भी उतना ही जरूरी
आय बढ़ाने के साथ-साथ अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना भी जरूरी है। जिन योजनाओं का लाभ सीमित है, उनकी समीक्षा होनी चाहिए। हर खर्च की उपयोगिता तय हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हों, तभी जनता के पैसे का सही मूल्य मिलेगा।
सफाई और रखरखाव को मिले स्थायी बजट
नई परियोजनाएं शुरू करना आसान है, लेकिन उनका रखरखाव अधिक महत्वपूर्ण होता है। शहर की सफाई, कूड़ा प्रबंधन, पार्कों की देखरेख, सार्वजनिक शौचालयों का संचालन और स्ट्रीट लाइट के रखरखाव के लिए अलग और पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि सुविधाएं लंबे समय तक बेहतर बनी रहें।
जनता की भागीदारी से बने बेहतर बजट
बजट केवल अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वार्ड स्तर पर लोगों से सुझाव लेकर प्राथमिकताएं तय की जाएं तो बजट अधिक प्रभावी साबित होगा। नागरिकों की भागीदारी से खर्च भी सही दिशा में होगा और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
संतुलन बनाना चुनौती
नगर निगम की फाइनेंस कमेटी के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीमित संसाधनों के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे आय भी बढ़े, खर्च भी नियंत्रित रहे और शहर के विकास की गति भी तेज हो। यदि बैठक में दूरदर्शी फैसले लिए गए तो इसका लाभ सीधे रोहतक के नागरिकों को मिलेगा।


