Wednesday, January 28, 2026
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रोहित धनखड़ हत्याकांड : हुमायूंपुर में हुई पंचायत, राष्ट्रीय जाट महासभा का एलान: न्याय नहीं मिला तो सड़कों पर उतरेगा समाज

रोहतक :अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डर एवं छह बार के राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता स्व. रोहित धनखड़ की नृशंस हत्या को लेकर रविवार को गांव हुमायूंपुर में एक महत्वपूर्ण पंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के प्रमुख संगठनों, खाप प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं एवं रोहित धनखड़ के परिजनों ने भाग लिया।

पंचायत में प्रशासन की अब तक की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया गया कि घटना को लगभग दो महीने समय बीत जाने के बावजूद 18–20 आरोपियों में से केवल 5 की गिरफ्तारी होना, पुलिस और प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

इस पंचायत में मुख्य रूप से राष्ट्रीय जाट महासभा भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. सचिन सरोहा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेंद्र चौधरी, महासचिव कुलदीप सिंह, सचिव अजयपाल, राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष अनुपमा चौधरी, हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन पावड़िया, हरियाणा युवा प्रदेश अध्यक्ष मोहित मलिक, किसान यूनियन छोटूराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद चौधरी, छात्र नेता दीपक धनखड़, हुमायूंपुर के पूर्व सरपंच संदीप धनखड़, स्व. रोहित धनखड़ के चाचा सतीश धनखड़, अधिवक्ता कपिल, अधिवक्ता अनुज कुमार सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पंचायत में उपस्थित वक्ताओं ने पूरे घटनाक्रम को दोहराते हुए बताया कि 27 नवंबर 2025 को रोहित धनखड़ भिवानी में एक शादी समारोह में गया था, जहां महिलाओं के सामने नशे की हालत में की जा रही अभद्रता का विरोध करने पर 18–20 युवकों ने मिलकर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह एक सुनियोजित और सामूहिक अपराध था, लेकिन इसके बावजूद आज तक पुलिस सभी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। पंचायत ने कहा कि अब तक की जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक ढिलाई और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे समाज और परिवार में भारी आक्रोश है।

पंचायत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि प्रशासन को अंतिम रूप से एक सप्ताह का समय दिया जाता है। इस अवधि में सभी फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और जो आरोपी नहीं मिल रहे हैं, उनकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई तुरंत शुरू की जाए। साथ ही यह भी मांग की गई कि रोहित धनखड़ के पीड़ित परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके।

इसके साथ-साथ पंचायत ने यह भी निर्णय लिया कि रोहित धनखड़ की स्मृति में उसके गांव में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल स्टेडियम या खेल अकादमी स्थापित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश मिले कि समाज अपने होनहार खिलाड़ियों को नहीं भूलता और अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होता है।

राष्ट्रीय जाट महासभा के पदाधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तो ग्रामीण पंचायत, राष्ट्रीय जाट महासभा और समाज के सभी संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसके बाद हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री से आखिरी मुलाकात की जाएगी और यदि वहाँ से भी न्याय का रास्ता साफ नहीं होता, तो यह आंदोलन प्रदेश-व्यापी रूप लेगा।

पंचायत में यह भी दोहराया गया कि समाज किसी प्रकार की अराजकता नहीं चाहता, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष से पीछे भी नहीं हटेगा। रोहित धनखड़ केवल एक परिवार का बेटा नहीं था, बल्कि पूरे समाज की पहचान और गौरव था। जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

अंत में पंचायत ने प्रशासन से अपील की कि वह समाज के धैर्य की परीक्षा न ले, समय रहते ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई करे, ताकि हालात बिगड़ने से पहले समाधान निकल सके। पंचायत का कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई में ढिलाई बरती गई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

पंचायत के दौरान जाट समाज के प्रतिनिधियों ने केवल न्याय की मांग ही नहीं रखी, बल्कि मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए रोहित धनखड़ के परिवार को तात्कालिक आर्थिक सहायता के रूप में 51,000 प्रदान किए।

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