कविता.रोहतक : सड़कों पर गोवंश एक बार फिर मुसीबत बनकर घूमने लगा है। दिल्ली रोड, सोनीपत रोड, गांधी कैंप और जाट भवन के पास गोवंश सड़क पर बैठे और घूमते नजर आ रहे हैं। इससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई बार चालकों को अचानक ब्रेक लगाकर वाहन रोकना पड़ता है, तो कहीं गोवंश के आसपास से बेहद सावधानी के साथ निकलना पड़ता है। सबसे ज्यादा खतरा तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर बैठे गोवंश से है। स्थानीय स्तर पर गोवंश को पकड़ने का अभियान लंबे समय से नहीं चलने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सड़कों पर गोवंश की मौजूदगी लगातार परेशानी बढ़ा रही है, तो नगर निगम की ओर से इन्हें पकड़ने के लिए अभियान कब चलाया जाएगा।
दिल्ली रोड से सोनीपत रोड तक, सड़कों पर डेरा
शहर के प्रमुख मार्गों पर गोवंश की मौजूदगी वाहन चालकों के लिए परेशानी बन रही है। दिल्ली रोड और सोनीपत रोड पर गोवंश सड़क पर बैठे या घूमते दिखाई दे रहे हैं। गांधी कैंप और जाट भवन के पास भी यही स्थिति नजर आ रही है। इन रास्तों पर वाहनों की आवाजाही के बीच गोवंश की मौजूदगी से यातायात प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। वाहन चालकों को अपनी रफ्तार कम करनी पड़ती है और कई बार रास्ता बदलकर निकलना पड़ता है। व्यस्त सड़कों पर यह स्थिति किसी भी समय हादसे की वजह बन सकती है।
अचानक ब्रेक या फिर बचकर निकलने की मशक्कत
सड़क पर बैठे गोवंश के कारण वाहन चालकों को हर समय सतर्क रहना पड़ता है। कई बार दूर से गोवंश दिखाई देने पर चालक वाहन की रफ्तार कम कर लेते हैं, लेकिन अचानक सामने आने या बीच सड़क पर बैठने की स्थिति में मुश्किल बढ़ जाती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा अधिक रहता है, क्योंकि अचानक ब्रेक लगाने या वाहन मोड़ने से संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं, पीछे से आ रहे वाहनों की गति भी हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में सड़क पर गोवंश की मौजूदगी केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी है।
गोवंश पकड़ने का अभियान ठप, फिर बढ़ी परेशानी
गोवंश को सड़कों से हटाने के लिए नगर निगम की ओर से अभियान चलाया जाता रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, काफी समय से ऐसा अभियान नजर नहीं आया है। इसके चलते प्रमुख मार्गों पर गोवंश की मौजूदगी फिर परेशानी बढ़ा रही है। सवाल यह है कि गोवंश पकड़ने की कार्रवाई नियमित क्यों नहीं हो रही और जिन स्थानों पर बार-बार गोवंश दिखाई देते हैं, वहां विशेष निगरानी क्यों नहीं की जा रही। यदि समय रहते इन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया जाए, तो वाहन चालकों के साथ-साथ गोवंश के घायल होने का खतरा भी कम किया जा सकता है।
हादसे के बाद जागेगा निगम या पहले होगी कार्रवाई
सड़कों पर गोवंश की मौजूदगी से हादसे का खतरा बना हुआ है। ऐसे में नगर निगम के सामने चुनौती केवल गोवंश पकड़ने की नहीं, बल्कि इस व्यवस्था को नियमित बनाए रखने की भी है। प्रमुख मार्गों और उन स्थानों पर विशेष अभियान चलाने की जरूरत है, जहां गोवंश बार-बार दिखाई देते हैं। साथ ही, पकड़े गए गोवंश को सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाने और दोबारा सड़कों पर आने से रोकने के लिए भी व्यवस्था जरूरी है। अब सवाल यही है कि नगर निगम इस समस्या को दूर करने के लिए कब अभियान शुरू करेगा। क्या कार्रवाई हादसे होने के बाद होगी या उससे पहले ही सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

