Monday, March 9, 2026
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MDU रोहतक के कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत के शोध को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में मिला स्थान

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक (MDU) के कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत के शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था यूनाइटेड नेशंस साइंटिफिक कमेटी ऑन द इफेक्ट्स ऑफ एटॉमिक रेडिएशन (यूएनएससीईएआर) द्वारा जारी यूएनएससीईएआर-2024 रिपोर्ट में उनके शोध को संदर्भ के रूप में शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के वैज्ञानिक परिशिष्ट में डॉ. कृष्णकांत, भूपेंद्र सिंह और डॉ. मनीषा गर्ग द्वारा किए गए अध्ययन- रेडियोलॉजिकल असेसमेंट ऑफ 222आरएन, 220आरएन, इक्विलिबरियम इक्विवलेंट रेडॉन कॉन्सन्ट्रेशन (ईईआरसी) एंड इक्विलिबरियम इक्विवलेंट थोरोन कॉन्सन्ट्रेशन (ईईटीसी) इन रेजिडेंशियल द्विलिंग्स ऑफ डिस्ट्रिक्ट पलवल, साउथर्न हरियाणा, इंडिया (2022) को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त डॉ. कृष्णकांत और भूपेंद्र सिंह का एक अन्य शोध- एनुअल इफेक्टिव डोज ड्यू टू इनहेलेशन ऑफ इंडोर रेडियोन्यूक्लिड्स एंड देयर प्रोजेनी मेजर्ड बाय ट्रैक एट्चेड टेक्नीक्स यूजिंग पिन्होल डोसीमीटर एंड डिपोजिशन- बेस्ड प्रोजेनी सेंसर्स (2023) भी रिपोर्ट में संदर्भित किया गया है।
यह अध्ययन दक्षिण हरियाणा के पलवल जिले में घरों के भीतर पाई जाने वाली रेडॉन और थोरॉन गैस के स्तर तथा उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के आकलन से संबंधित है। संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट विश्वभर में आयनकारी विकिरण के स्रोतों, प्रभावों और उससे जुड़े जोखिमों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है तथा इसमें वैश्विक स्तर पर हुए महत्वपूर्ण शोधों को स्थान दिया जाता है।
इस उपलब्धि पर डॉ. कृष्णकांत ने कहा कि उनके शोध समूह के निष्कर्षों का यूएनएससीईएआर-2024 रिपोर्ट में शामिल होना अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी टीम की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके माध्यम से वे विकिरण के प्रभावों को लेकर वैश्विक समझ को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की इस प्रतिष्ठित रिपोर्ट में एमडीयू से जुड़े शोध को स्थान मिलना न केवल विश्वविद्यालय बल्कि प्रदेश और देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
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